राष्ट्रीय हिन्दू रक्षा परिषद ने रविवार को लखनऊ में सामाजिक समरसता गोष्ठी और समरसता सहभोज का आयोजन किया।यह कार्यक्रम गोमती तट स्थित श्री खाटू श्याम मंदिर परिसर में किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सनातनी एकत्र हुए और समाज को जोड़ने का संदेश दिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म की ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ भावना को सशक्त करते हुए समाज में एकता, समानता और भाईचारे को मजबूत करना था। मंच पर उपस्थित संत-महात्माओं और वक्ताओं ने कहा कि सनातन धर्म करुणा, समरसता और समान जीवन-दृष्टि पर आधारित है। ‘सनातनी’ पहचान अपनाने की अपील की कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय हिन्दू रक्षा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार सनातनी ने सनातनियों से अपने नाम के साथ जुड़े जाति-सूचक शब्द हटाने और केवल ‘सनातनी’ पहचान अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जातीय व्यवस्था को राजनीतिक स्वार्थों के लिए बढ़ावा दिया गया है, जबकि धर्मग्रंथों और महापुरुषों ने कभी भेदभाव की शिक्षा नहीं दी।राष्ट्रीय महासचिव मुकेश सनातनी ने घोषणा की कि यह अभियान देशभर में प्रदेश, नगर, वार्ड और ग्राम सभा स्तर तक चलाया जाएगा। संगठन के कार्यकर्ता घर-घर जाकर समाज को जोड़ने का कार्य करेंगे। ये लोग शामिल हुए इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय महामंडलेश्वर बाबा महादेव, यशवेंद्र विक्रम सिंह, कौशलेंद्र नाथ, आचार्य संजय वैदिक, संजय दास बाबा, बजरंग दास, महंत हररामदास सहित अनेक संत, साधु और विचारक उपस्थित रहे। इस आयोजन ने समरसता को सनातन समाज की सच्ची शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया।