लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रबंधन विज्ञान संस्थान (IMS) में महिलाओं की कार्यस्थल सुरक्षा पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला ‘कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध व निवारण) अधिनियम 2013’ विषय पर केंद्रित थी। इसका आयोजन IMS ने प्रो बोनो क्लब, विधि संकाय, लखनऊ के सहयोग से किया। कार्यक्रम IMS के सेमिनार हॉल में हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। इसका संचालन लखनऊ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मनुका खन्ना और IMS की विशेष कार्याधिकारी प्रो. विनीता काचर के मार्गदर्शन में किया गया। महिलाओं के अधिकारों से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी दी कार्यशाला की शुरुआत अधिनियम 2013 के उद्देश्यों, नियमों और कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकारों से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी के साथ हुई। विशेषज्ञ वक्ताओं ने POSH एक्ट की अहमियत बताते हुए कहा कि यह कानून न सिर्फ महिलाओं को सुरक्षित माहौल प्रदान करता है, बल्कि संस्थानों को भी जवाबदेह बनाता है। कार्यशाला में यह भी बताया गया कि यौन उत्पीड़न की किसी भी घटना पर महिला कर्मचारी या छात्रा तुरंत आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के पास शिकायत दर्ज करा सकती हैं। वक्ताओं ने वास्तविक उदाहरणों के जरिए समझाया कि कई बार घटनाएं ‘अनुचित व्यवहार’ के रूप में नजरअंदाज कर दी जाती हैं, जबकि कानून उन्हें स्पष्ट रूप से उत्पीड़न की श्रेणी में रखता है। कार्यस्थल पर संवेदनशील माहौल बनाने की जिम्मेदारी पर चर्चा की एमबीए और बीबीए के अंतिम वर्ष के छात्रों ने इस कार्यशाला में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। छात्रों ने सवाल पूछकर न सिर्फ कानूनी प्रक्रियाओं को समझा, बल्कि कार्यस्थल पर संवेदनशील माहौल बनाने की जिम्मेदारी पर भी चर्चा की। कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि युवाओं को कानून की समझ होने से वे भविष्य में न सिर्फ अपने लिए, बल्कि अपने कार्यस्थल को भी सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे। कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए प्रो बोनो क्लब और IMS की टीम की सराहना की गई। आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि महिला सुरक्षा से जुड़ी जागरूकता व्यापक स्तर पर फैलाई जा सके।