लखनऊ के पेपरमिल कॉलोनी स्थित कैफ़ी आज़मी सभागार में रविवार को हिन्दी त्रैमासिक पत्रिका ‘कथाक्रम’ का 33वाँ वार्षिक समारोह आयोजित हुआ। इस अवसर पर वरिष्ठ कथाकार भालचंद्र जोशी को ‘आनंद सागर स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया। उन्हें मानपत्र और 21,000 रुपये की राशि प्रदान की गई। समारोह की अध्यक्षता प्रसिद्ध आलोचक वीरेंद्र यादव ने की। चर्चित कथाकार शिवमूर्ति मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि लेखक लोकबाबू ने विशिष्ट अतिथि की भूमिका निभाई।कथाकार रूपा सिंह ने एक विशेष व्याख्यान दिया। भालचंद्र जोशी की रचनात्मक यात्रा, उनकी भाषा और कथ्य की विशिष्टताओं के बारे में बताया। रूपा सिंह ने कहा कि जोशी की कहानियाँ समाज के बुनियादी सवालों को संवेदनशीलता से प्रस्तुत करती हैं और पाठकों को गहराई से प्रभावित करती हैं। 1990 से लगातार आयोजित किया जा रहा पत्रिका ‘कथाक्रम’ द्वारा यह सम्मान समारोह वर्ष 1990 से लगातार आयोजित किया जा रहा है। संपादक शैलेन्द्र सागर ने अपने संबोधन में कहा कि उनके लिए साहित्य केवल चकाचौंध का विषय नहीं, बल्कि समाज के सरोकारों और विचार-विमर्श का मंच है। सम्मान समारोह के साथ इस वर्ष भी एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका विषय ‘हिन्दी साहित्य और जनपदीय भाषाएं’ था। कार्यक्रम तीन सत्रों में विभाजित था। पहले सत्र में सम्मान प्रदान किया गया, जबकि अगले दो सत्रों में देशभर से आए रचनाकारों, भाषाविदों और आलोचकों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रो. राज कुमार ने विषय प्रवर्तन किया, और प्रो. श्रुति एवं नलिन रंजन सिंह ने संचालन की जिम्मेदारी संभाली। हिंदी के विकास में क्षेत्रीय बोलियों की भूमिका पर चर्चा संगोष्ठी में भाषाओं की समृद्ध विरासत, जनपदों से उभरती लोकसंस्कृति और हिंदी के विकास में क्षेत्रीय बोलियों की भूमिका पर गहन विमर्श हुआ। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि साहित्य तभी पूर्णता प्राप्त करता है, जब वह जनमानस की भाषा में अभिव्यक्त हो। इस अवसर पर प्रो. जगदीश चतुर्वेदी, रोहित से राजकुमार, प्रो. सरोज गुप्ता, प्रो. रोहिणी अग्रवाल, प्रो. शशि भूषण, ईश्वर सिंह दोस्त, प्रो. राम बहादुर मिश्रा, उदय प्रकाश, अवधेश मिश्रा, कुमार अनुपम और डॉ. रजनी गुप्त सहित कई अन्य प्रतिष्ठित साहित्यकार और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।