विश्रुत मेमोरियल ट्रस्ट ने किया वार्षिक कार्यक्रम:रीता जैन की दो पुस्तकों का विमोचन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं

गोमती नगर स्थित इंटरनेशनल बौद्ध संस्थान में विश्रुत मेमोरियल ट्रस्ट की ओर सें सातवां वार्षिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन दिवंगत विश्रुत की स्मृतियों को समर्पित था, जिसमें साहित्य, संवेदना और सेवा का संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में लेखिका रीता जैन की दो पुस्तकों का विमोचन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व आईएएस दयानंद लाल ने की,जबकि स्वागत भाषण डॉ. अरुण कुमार जैन ने दिया। दयानंद लाल ने विश्रुत के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कम उम्र में बड़े सपने देखे और उन्हें पूरा किया। उन्होंने यह भी बताया कि डॉ. अरुण जैन विश्रुत के अधूरे सपनों को निष्ठापूर्वक आगे बढ़ा रहे हैं। 26 वर्ष की आयु में वाइस चेयरमैन का पद संभाला था मुख्य अतिथि आशुतोष शुक्ल ने परिवार और संस्कारों के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने लेखिका रीता जैन की पुस्तकों ‘स्त्री और कैक्टस’ तथा ‘सत्य समागम’ का उल्लेख करते हुए अन्नप्राशन से मुंडन तक की परंपराओं और कोरोना काल में परिवार की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। विश्रुत ने मात्र 26 वर्ष की आयु में एक मल्टीनेशनल कंपनी में वाइस चेयरमैन का पद संभाला था। उन्होंने अपने संसाधनों से सिंगापुर, बैंकॉक और नेपाल में लगभग 800 महिलाओं को शिक्षित और सशक्त किया। वर्ष 2006 से उन्होंने नेपाल में 16 बालिकाओं की संपूर्ण पढ़ाई, रहने-खाने और आवागमन की जिम्मेदारी भी उठाई। 4 फरवरी 2018 को 44 वर्ष की आयु में नेपाल में हृदयाघात से उनका निधन हो गया था। ट्रस्ट सामाजिक कार्यों को निरंतर आगे बढ़ा रहा डॉ. अरुण कुमार जैन, जो बलरामपुर चिकित्सालय से सेवानिवृत्त वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं, पिछले 20 वर्षों से सत्य हॉस्पिटल एवं रिसर्च इंस्टीट्यूट का संचालन कर रहे हैं। वे निर्बल वर्ग की छात्राओं को निःशुल्क फिजियोथैरेपी डिप्लोमा भी करवा रहे हैं और विश्रुत द्वारा शुरू किए गए सभी सामाजिक कार्यों को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं।साहित्यिक सत्र में दयानंद पांडेय,संजय जायसवाल, करुणा पांडे और निवेदिता ने रीता जैन की रचनाओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इस अवसर पर विश्रुत की बहन श्रुति और उनका पुत्र भी उपस्थित थे।छात्रों की संगीतमय प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और भी यादगार बना दिया।