अयोध्या जिला अस्पताल में एक शुगर के मरीज को सुनसान बरामदे में पड़े बेड पर हाथ-पैर बांधकर रखा गया। उसके सामने खाने की थाली रखी गई। लेकिन, हाथ बंधे होने से के कारण वो थाली तक पहुंच नहीं पाया। इसका वीडियो भी सामने आया है। वीडियो सामने आते ही अफसरों ने मरीज को अयोध्या मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। वहां इलाज के दौरान सोमवार को मरीज की मौत हो गई। मरीज 4 नवंबर को जिला अस्पताल में भर्ती हुआ था। पहले 2 तस्वीरें देखिए अब पूरा मामला विस्तार से… बावर्ची का काम करके खर्चा चलाता था
अब तक की जांच में पता चला है कि जिला अस्पताल के बेड से बंधा युवक शुगर का पेशेंट था। लेकिन, अस्पताल में उसको मानसिक रोगी बताया दिया गया। युवक बीकापुर थाना क्षेत्र के सराय भनौली का रहने वाला सालिग राम (45) था। सालिग फैजाबाद में बावर्ची का काम करके अपना घर चलाता था। उसके परिवार में पत्नी माधुरी देवी, एक बेटा और दो बेटियां हैं। तीनों बच्चे अभी नाबालिग हैं। भतीजा बोला- खाना बनाने के लिए निकले, फिर नहीं लौटे सालिग के भतीजे विनोद ने बताया- मेरे चाचा मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ थे। 4 नवंबर को काम पर निकले थे। लेकिन उसके बाद घर नहीं लौटे। उनके साथ काम करने वाले कई कारीगरों को फोन भी किया, लेकिन कुछ पता नहीं लगा। रविवार को ग्राम प्रधान ने घर पर आकर बताया कि सालिग राम जिला अस्पताल में भर्ती है। उसकी तबीयत खराब थी। अब सालिग राम को जिला अस्पताल से राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया गया है। ग्राम प्रधान की बात सुनकर हम लोग मेडिकल कॉलेज पहुंचे। वहां पता चला कि चाचा का शुगर लेवल घट-बढ़ रहा था। इससे वह बार-बार बेहोश हो जाते थे। लेकिन, इतने दिन तक किसी ने उनका शुगर का इलाज नहीं किया था। हमारे सामने ही कुछ ही घंटे में उनकी मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से हमने उन्हें खो दिया। अस्पताल के स्टाफ ने हमें बताया कि करीब एक हफ्ते चाचा कहीं रास्ते में बेहोश हो गए थे। उन्हें एक ई-रिक्शा वाला जिला अस्पताल लेकर आया था। वह गेट पर ही उन्हें छोड़कर चला गया था। इसके बाद अस्पताल ने उन्हें पागल समझकर बरामदे में एक बेड पर एडमिट कर दिया था। विनोद ने बताया- वहां का एक वीडियो भी हमने देखा है। उन्हें खाना तक नहीं खाने दिया जा रहा था। देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे अस्पताल में मरीजों का जानवरों से भी बदतर इलाज किया जाता है। पत्नी बोली- मेरे पति की मौत का जिम्मेदार जिला अस्पताल
सालिग की पत्नी माधुरी देवी ने रोते हुए कहा- मेरे पति की मौत का जिम्मेदार प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग है। जिस तरह से मेरे पति को हाथ-पैर बांध कर रखा गया। उन्हें जानवरों की तरह इलाज दिया गया। इसी वजह से उनकी मौत हुई है। मेरे पति की मौत के जिम्मेदार जिला अस्पताल वाले हैं। वहीं, ग्राम प्रधान विजय गौड़ ने बताया- सालिग राम का परिवार बहुत ही गरीब है। बावर्ची का काम करके वो अपने परिवार का पेट भरता था और बच्चों को पढ़ाता भी था। वो पागल नहीं था, डायबिटीज का पेशेंट था। गांव में रहने वाले भाजपा नेता परशुराम निषाद ने बताया कि जिस प्रकार से मौत की खबर सुनी गई और अस्पताल का दृश्य देखा गया, यह घोर निंदनीय है। इस प्रकार से किसी के हाथ-पैर बांध कर इलाज नहीं करना चाहिए। उच्च अधिकारी जांच पड़ताल कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें। सीएमएस बोले- अस्पताल प्रशासन जांच के घेरे में
प्रभारी सीएमएस डॉ. राजेश सिंह ने बताया- मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इसकी अध्यक्षता डॉ. एके सिन्हा करेंगे, जबकि डॉ. मो. अकरम और मैट्रन इंदिरा राय सदस्य हैं। 3 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। कमेटी जांच करेगी कि मरीज को बरामदे में किसने पहुंचाया? हाथ-पैर किसने बांधे? उसके सामने खाना किसने रखा? स्वास्थ्य विभाग बोला- मरीज को बांधना गलत
अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. बीके चौहान ने कहा- भले ही मरीज मानसिक रोगी हो, उसे बांधना गलत था। रेफर किया जा सकता था। लेकिन, जिस तरह उसे बरामदे में बेड से बांधकर छोड़ दिया गया, वह अमानवीय है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय चौधरी ने कहा- 4 नवंबर की रात मरीज को ई-रिक्शा चालक अस्पताल गेट पर छोड़ गया था। भर्ती के बाद उसने गद्दे और कपड़े फाड़ दिए थे। वार्ड से भागने की कोशिश भी की थी। इसलिए उसे मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। अब यह जांच का विषय है कि उसे बरामदे में कौन ले गया और क्यों बांधा गया। ———————– ये खबर भी पढ़ें… प्रयागराज में महिला की लाश को घसीटा, पुलिसकर्मी खड़ा होकर देखता रहा, ट्रैक पर मिली थी डेडबॉडी प्रयागराज में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना हुई। यहां स्वरूप रानी अस्पताल की मॉर्च्युरी में महिला की डेडबॉडी को एक व्यक्ति घसीटकर ले गया। जबकि वहीं एक पुलिसकर्मी खड़ा होकर यह सब देखता रहा। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। पढ़ें पूरी खबर…