संगम में रास्तों के बदलाव ने बढ़ाई मुश्किलें:गाटा रोड बंद होने से कल्पवासियों की आवाजाही मुश्किल

संगम क्षेत्र में प्रशासन द्वारा भीड़ नियंत्रण के नाम पर किए गए रास्तों के बदलाव कल्पवासियों और तीर्थयात्रियों के लिए जी का जंजाल बन गए हैं। त्रिवेणी रोड स्थित पुल संख्या दो के पास गाटा रोड को अचानक बंद किए जाने से सैकड़ों श्रद्धालु और स्थानीय पंडा समाज के लोगों को आने जाने में मुश्किलें हो रही हैं। प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों में आक्रोश है। 2​500 कल्पवासी और पंडा समाज प्रभावित ​स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस मार्ग को प्रशासन ने अवरुद्ध किया है। वहां पर पंडा और लगभग 2500 कल्पवासी ठहरे हुए हैं। रास्ते बंद होने के कारण इन लोगों के लिए बुनियादी आवाजाही भी दूभर हो गई है। अपनी समस्या बताते हुए रामसिंह ने कहा कि प्रशासन को केवल संगम पर भीड़ बढ़ने की चिंता है, लेकिन यात्रियों की परेशानियों से उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। यह प्रबंधन नहीं, बल्कि जनता पर अत्याचार है। ​बुजुर्गों और महिलाओं के लिए बढ़ी मुसीबत ​रास्ता बंद होने के कारण श्रद्धालुओं को स्नान, पूजा-पाठ और खरीदारी के लिए अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत रात के समय उत्पन्न होती है। जब बुजुर्गों और बच्चों के साथ आए परिजनों को सही रास्ता खोजने में भारी कठिनाई होती है। कल्पवासियों का आरोप है कि अधिकारी जमीनी हकीकत जाने बिना ही “रास्ता बंद करो” जैसे आदेश पारित कर देते हैं, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। दुकानदार अभिषेक पांडे का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के नाम पर श्रद्धालुओं को इस तरह प्रताड़ित करना उचित नहीं है। प्रशासन को भीड़ नियंत्रण और जन-सुविधा के बीच संतुलन बनाना चाहिए ताकि संगम आने वाले भक्तों को मानसिक और शारीरिक कष्ट न झेलना पड़े।