सजा के बाद चोटी कटवा दरोगा-सिपाही टशन में निकले, VIDEO:फर्रुखाबाद में वकीलों को रातभर पीटा, मोबाइल-पैसे लूटे थे

फर्रुखाबाद में कोर्ट ने कोतवाली में बंधक बनाकर रातभर पीटने, चोटी काटने और लूटपाट करने वाले दरोगा-सिपाही को 10-10 साल की जेल की सजा सुनाई। दोनों पर 61-61 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। सजा के बाद यूपी पुलिस के दरोगा-सिपाही टशन में कोर्ट से बाहर आते दिखाई दिए। उनके चेहरे पर न तो पछतावा था, न ही कोई शिकन। इतना ही नहीं, पुलिसवालों ने उन्हें हथकड़ी तक नहीं पहनाई। उन्हें खुले हाथ ही कोर्ट से जेल तक ले जाया गया। 8 साल तक चले इस मुकदमे में एंटी डकैती विशेष न्यायाधीश शैलेंद्र सचान ने दोषियों से जुर्माने के एवज में ली गई राशि से 40-40 हजार रुपए तीनों पीड़ितों को बतौर मुआवजा देने का आदेश दिया। जुर्माना न भरने पर दरोगा-सिपाही को 6 महीने ज्यादा जेल की सजा काटने के निर्देश दिए। दरअसल, 8 साल पहले पड़ोसी से विवाद की शिकायत लेकर फतेहगढ़ कोतवाली पहुंचे तीन युवकों को पुलिस ने कोतवाली में रात भर पीटा था। पीड़ितों ने पुलिस पर मारपीट और लूट का परिवारवाद दाखिल कराया था। जिसमें अब कोर्ट ने फैसला सुनाया। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों दोषी दरोगा-सिपाही को जेल भेज दिया गया। घटना की कहानी पढ़िए पीड़ितों की जुबानी पड़ोसी से विवाद में हुई थी फायरिंग
कोतवाली फतेहगढ़ के नेकपुल खलां निवासी शैलेंद्र कुमार शर्मा पेशे से वकील हैं। 10 जनवरी 2018 की सुबह 9 बजे उनका अपने पड़ोसी दयानंद कटियार, अभिनव कटियार और आशा कटियार से विवाद हो गया था। आरोप है कि पड़ोसियों ने शैलेंद्र को पीटा और जान से मारने की नीयत से फायर किया। पर वे बाल-बाल बच गए। कोतवाली में पुलिस ने बनाया समझौते का दबाव
शैलेंद्र ने बताया- वे शाम में अपने दो दोस्तों सलिल शर्मा और अमित गौतम के साथ जब फतेहगढ़ कोतवाली में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे। वहां FIR दर्ज नहीं की गई। चौकी प्रभारी अनिल कुमार भदौरिया, सिपाही सुरेंद्र सिंह, SSI दीपक कुमार और सिपाही नवनीत यादव समझौते का दबाव बनाते हुए गाली गलौज करने लगे। विरोध पर पीटा, लूटा, चोटी काटी
शैलेंद्र ने समझौता करने से इनकार किया तो दरोगा और दोनों सिपाहियों ने तीनों को बांधकर लाठी-डंडे से रात भर पीटा। शैलेंद्र का मोबाइल और 2 हजार रुपए लूट लिए। जातिगत गालियां देते हुए शैलेंद्र की चोटी को ब्लेड से काट दिया। झूठे मुकदमे लगाकर जेल में डाल दिया। 6 महीने अधिकारियों के पास भटका
सुबह जानकारी मिलने पर परिजनों ने कोतवाली पहुंचकर शैलेंद्र और उनके दोनों वकील साथियों की जमानत कराई। शैलेंद्र ने बताया- 6 महीने तक मैं न्याय के लिए अधिकारियों के पास भटकता रहा। सीएम दरबार, डीजीपी से लेकर कानपुर-लखनऊ एडीजी तक के पास गया, पर न्याय नहीं मिला। कोर्ट से गुहार लगाई, 8 साल बाद मिला न्याय
शैलेंद्र के वकील राहुल परिहार और राजीव सिंह राठौर ने बताया- घटना के 6 महीने के बाद 21 जुलाई 2018 को कोर्ट में परिवाद दाखिल कराया गया। कोर्ट ने शैलेंद्र के खिलाफ दर्ज फर्जी मुकदमों पर स्टे लगाकर मामले की जांच के आदेश दिए। जांच में दरोगा अनिल कुमार भदौरिया और सिपाही सुरेंद्र सिंह को दोषी पाया गया। हालांकि, आरोपी दीपक कुमार और सिपाही नवनीत यादव को हाईकोर्ट से स्थगन आदेश मिल गया। 8 महीने तक सुनवाइयां चलीं। बुधवार को कोर्ट ने दोनों को दोषी करार दिया। वहीं, शुक्रवार को कोर्ट ने दोनों को 10-10 साल की जेल और 61-61 हजार जुर्माने की सजा सुनाई। खुद इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे शैलेंद्र
शैलेंद्र ने बताया- भले ही 8 साल बाद फैसला आया, पर कोर्ट की कार्रवाई से मैं संतुष्ट हूं। जिन धाराओं में मुकदमा हुआ था, उनमें आरोपियों को अधिकतम सजा कोर्ट ने सुनाई है। शैलेंद्र ने बताया- वे खुद ही वर्तमान में इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हैं। ———————————————- ये खबर भी पढ़िए… बर्फीले तूफान से जिंदा बचकर निकले यूपी के 4 दोस्त:माइनस 25°C टेंपरेचर में बॉडी अकड़ी, लगा बचेंगे नहीं; पढ़िए वो 36 घंटे -25°C टेम्प्रेचर…चारों ओर बर्फ ही बर्फ थी। हमारे सिवाय वहां कोई दूसरा नजर नहीं आ रहा था। हमने आवाजें लगाईं, गाड़ी का हॉर्न बजाया, बर्तन बजाए, चीखे चिल्लाए भी, लेकिन हमारी बात सुनने वाला वहां कोई नहीं था। यह कहना है लेह से लौटे शिवम चौधरी का। गूगल मैप की वजह से रास्ता भटककर बर्फबारी के बीच फंसे आगरा के 4 दोस्तों ने 36 घंटे जिंदगी के लिए जंग लड़ी। इसमें आखिर के 3 घंटे बहुत खौफनाक रहे। पढ़िए पूरी खबर…