साध्वी प्राची बोलीं- लड़कियों तुम काली बनो, बुर्के वाली नहीं:कहा- लव जिहाद करने वालों को मौके पर ही सबक सिखा देना चाहिए

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में साध्वी प्राची ने आर्य समाज मंदिर में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने हिंदुस्तान को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग की। उन्होंने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की दिल्ली से वृंदावन तक की पदयात्रा का समर्थन किया और कहा कि वह भी इस पदयात्रा में शामिल होंगी। साध्वी प्राची ने धीरेंद्र शास्त्री के उस बयान का भी समर्थन किया, जिसमें उन्होंने सनातन धर्म की लड़कियों से ‘काली बनो, पर बुर्के वाली ना बनो’ कहा था। साध्वी प्राची ने सनातन धर्म की बेटियों से कहा कि वे ‘काली बनें, कल्याणी बनें, लेकिन बुर्के वाली कभी न बनें’, अन्यथा उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। पत्नियों द्वारा पति की हत्या के सवाल पर उन्होंने मेरठ की एक पुरानी घटना का जिक्र किया, जहां एक बच्चे के शव के 15 टुकड़े ड्रम में मिले थे। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं दुखद हैं। साध्वी प्राची ने इसका कारण बच्चों को संस्कारी न बनाना बताया, बल्कि केवल आर्थिक और तकनीकी शिक्षा पर जोर देना बताया। उन्होंने कहा कि हम बच्चों को आईएएस, डीएम, प्रोफेसर या इंजीनियर बनाने की होड़ में लगे हैं, लेकिन जब तक उन्हें संस्कारी नहीं बनाएंगे, तब तक वे मानव नहीं बनेंगे। उन्होंने वेद और आर्य समाज का हवाला देते हुए कहा कि ‘मनुरभव इंसान बनो’, यानी इंसान बनो, न कि ईसाई या मुसलमान। इंस्टाग्राम के माध्यम से हिंदू बच्चियों को फंसाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया भी एक बड़ा कारण बन गया है। जिस तरह से आजकल रील्स बनाई जा रही हैं, उससे इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि लव जिहाद करने वालों को मौके पर ही सबक सिखा देना चाहिए। उनका कहना था कि हमारा कानून बहुत लचर है, सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कठोर कानून बनाने चाहिए। जो लोग हमारे धर्म के खिलाफ षड्यंत्र रचते हैं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। बिहार में बुर्के की आड़ में फर्जी मतदान के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं चैनलों के माध्यम से चुनाव आयोग का धन्यवाद करती हूं, जिसने बिहार में बहुत अच्छा कदम उठाया था। लेकिन मुस्लिम तुष्टिकरण की पराकाष्ठा में डूबे कुछ नेता इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बुर्के का मामला बहुत संजीदगी से विचार करने योग्य है। जो महिलाएं बुर्का पहनकर वोट डालने जाती हैं, उनसे मैं पूछना चाहती हूं — जब वे आधार कार्ड या पासपोर्ट बनवाती हैं, तब तो चेहरा दिखाना पड़ता है, फिर वोट देने के समय चेहरा क्यों नहीं दिखाया जा सकता? अगर विरोध केवल वोटिंग के समय हो रहा है, तो इसका मतलब साफ है कि दाल में कुछ काला है।