सामूहिक विवाह में कम खाना बनाने वाली फर्म ब्लैकलिस्ट:12000 लोगों के लिए बनना था, कुर्सियां कम थीं; रसगुल्ले के लिए लूट मची थी

कानपुर में दैनिक भास्कर एप की खबर का बड़ा असर हुआ है। 11 दिसंबर को सीएसए मैदान में हुए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना अंतर्गत हुए सामूहिक विवाह में जनाती व बाराती के लिए कम खाना बनाने वाली फर्म पर कार्रवाई हुई है। मामले में जांच के बाद गंभीर खामियां पाए जाने पर आयोजन कराने वाली फर्म को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है। साथ ही फर्म पर आगामी पांच वर्षों तक किसी भी सरकारी विभाग में काम करने पर रोक लगा दी गई है। इसके अलावा आने वाले समय में होने वाले सामूहिक विवाह में फर्म को हुए टेंडर को भी निरस्त कर दिया गया है। डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह के अनुमोदन के बाद आयोजनकर्ता फर्म नेशनल फेडरेशन ऑफ फार्मर्स प्रोक्योरमेंट, प्रोसेसिंग एंड रिटेलिंग कोऑपरेटिव्स ऑफ इंडिया लिमिटेड को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। मामले में समाज कल्याण अधिकारी शिल्पी सिंह को गड़बड़ी मिलने के बाद लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। 12342 लोग आए, खाना सिर्फ 2300 लोगों का बना
सीडीओ दीक्षा जैन ने बताया कि कार्यक्रम के दिन अव्यवस्थाएं सामने आने पर एडीएम सिटी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय संयुक्त जांच समिति का गठन किया गया था। जांच में पाया गया कि 635 वैवाहिक जोड़ों के लिए जारी कार्यादेश के बावजूद मौके पर उपस्थित 561 जोड़ों और उनके परिजनों के लिए व्यवस्थाएं नाकाफी थीं। करीब 12,342 लोगों की मौजूदगी के मुकाबले फर्म ने केवल 2100 से 2300 लोगों के लिए ही भोजन की व्यवस्था की थी, वह भी तय मेनू के अनुसार नहीं थी। बैठने, जलपान और अन्य सुविधाओं को लेकर परिजनों को परेशानी उठानी पड़ी। वेदियां, फोटोग्राफर व कुर्सियां कम, पंडाल भी छोटा
कमेटी द्वारा की गई जांच में सामने आया है कि पूजन सामग्री और आयोजन प्रबंधों में भी भारी कमी सामने आई। तय संख्या के मुकाबले वेदियां कम रहीं, फोटोग्राफरों की संख्या बेहद कम पाई गई और जयमालाओं, लड्डू तथा ड्राई फ्रूट्स में भी कमी दर्ज की गई। पंडाल छोटा रहा और कुर्सियों की संख्या जरूरत से काफी कम थी। एलईडी स्क्रीन, सजावट, बैनर और स्टैंडी जैसी व्यवस्थाएं भी अधूरी रहीं। संयुक्त जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि फर्म द्वारा की गई व्यवस्थाएं कुल आवश्यकता की तुलना में केवल लगभग 45 प्रतिशत ही थी। फर्म द्वारा बिल प्रस्तुत करने पर कमियों के सापेक्ष कटौती करने के बाद ही भुगतान किया जाएगा। दीवार घड़ी में भी झोल, 1.40 लाख रुपये कटेंगे
जांच में उपहार सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए हैं। एम/एस नेशनल को-ऑपरेटिव कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा आपूर्ति की गई दीवार घड़ियां निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गईं। जांच में सामने आया है कि दीवार घड़ी मानकों की अपेक्षा छोटी थी। घड़ी वितरण में 1 लाख 40 हजार रुपये की गड़बड़ी सामने आने पर रकम संबंधित फर्म के भुगतान से सीधे काटी जाएगी। रसगुल्ले की हुई थी लूट
आयोजन वाले दिन खाना खुलते ही रसगुल्ले की लूट हुई थी। थाल में रसगुल्ले आते ही लोग उस पर टूट पड़े थे। इसके अलावा खाने को लेकर लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा था। डोंगों में सब्जी आते ही खत्म हो गई और लोग इंतजार में खड़े रहे थे। इसके अलावा कई लोगों को बिना खाना खाए ही वापस लौटना पड़ा था।