हमीरपुर में सामूहिक हत्याकांड में तीन दोषियों को उम्रकैद:कोर्ट ने 19-19 हजार रुपए का लगाया जुर्माना, 9 साल बाद आया फैसला

हमीरपुर में नौ साल पुराने सामूहिक हत्याकांड मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश (डकैती) अनिल कुमार खरवार की अदालत ने शुक्रवार को तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक दोषी पर 19-19 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। यह मामला एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या से जुड़ा है। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता मणिकर्ण शुक्ल ने बताया कि यह घटना 12 मई 2017 को हुई थी। थाना सिसोलर क्षेत्र के पासुन लेवा निवासी जुगुल किशोर ने मौदहा के कजियाना मोहल्ले में स्थित अपने बड़े पापा कृष्णपाल सिंह के घर में पांच शव मिलने की सूचना दी थी। मृतकों में कृष्णपाल सिंह, उनकी पत्नी कुसुमा देवी, पुत्री रानी, नातिन आकांक्षा और आकांक्षा की छह माह की पुत्री शामिल थीं। इस मामले में 13 मई 2017 को सौरभ सिंह निवासी पीपरी अठगइयां, थाना सिरसा कलार, जिला जालौन ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में जुगुल किशोर पर ही अपने साथियों के साथ मिलकर सामूहिक हत्या करने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने जुगुल किशोर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन चार माह बाद जांच में वह निर्दोष पाया गया। जांच में नया मोड़ तब आया जब 13 सितंबर 2017 को एसओजी प्रभारी रामाश्रय यादव ने हत्या के बाद लूटे गए मोबाइल के ईएमआई नंबर की लोकेशन ट्रेस की। यह लोकेशन मौदहा के बड़े चौराहा क्षेत्र में मिली। टीम ने दबिश देकर कामता उर्फ अजय सिंह और मूलचंद्र उर्फ मुल्लू श्रीवास नामक दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने हत्या की साजिश का खुलासा किया और मोबाइल मृतका रानी देवी के होने की पुष्टि हुई। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि कृष्णपाल का पारिवारिक भतीजा पुष्पेंद्र सिंह भी इस साजिश में शामिल था। पुष्पेंद्र ने उन्हें घर में भारी मात्रा में जेवरात और नकदी होने की जानकारी दी थी। लालच में आकर तीनों ने 10 मई 2017 को घर में घुसकर पहले सभी को शराब पिलाई। इसके बाद एक-एक कर सभी की गला घोंटकर और सिर पटककर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी जेवरात, नकदी और मोबाइल लूटकर फरार हो गए थे।