1 लाख के लिए हत्या…बॉडी को 3 टुकड़ों में काटा:सहारनपुर में नदी में फेंका, मां बोलीं- अवैध संबंध जैसी कोई बात नहीं

‘घर बुलाकर अमजद की हत्या कर दी। गला चुन्नी से घोंट दिया। फिर बॉडी को 3 टुकड़ों में काट दिया। इन टुकड़ों को बोरी में रखा। आधी रात को बाइक से 2 किलोमीटर दूर ढमोला नदी में फेंक दिया।’ ये कबूलनामा सहारनपुर में 3 नवंबर को अमजद की हत्या करने वाले आरोपी ठेकेदार फरमान और उसके साले का है। पुलिस ने 5 नवंबर को दोनों को अरेस्ट किया था। पूछताछ में उन्होंने जो कुछ बताया, वो बेहद चौंकाने वाला था। उन्होंने कबूल किया कि बर्बर हत्या की प्लानिंग रुपए के लेनदेन की वजह से की गई। फरमान ने 3 नवंबर की रात अमजद को घर बुलाया और दुपट्‌टे से उसका गला घोंट दिया। फिर कुल्हाड़ी से अमजद के दोनों पैर को काटकर धड़ से अलग कर दिए। दोनों पैर को अलग-अलग बोरियों में पैक किया। फिर एक बोरी में धड़ और दोनों पैरों को डाल दिया। फरमान ने अपने साले की मदद से बोरी को बाइक पर रखा। इसके बाद दोनों ढमोला नदी के पुल पर पहुंचे। यहां से लाश नीचे फेंक दी। पुलिस और NDRF की टीम 3 दिन से नदी में 20 किमी. के दायरे में सर्च ऑपरेशन चला रही है। हालांकि, बॉडी मिल नहीं सकी है। अब विस्तार से पूरा मामला पढ़िए… रिश्तेदार के सामने हुई बेइज्जती का लिया बदला
मामला सहारनपुर के शेखपुरा कदीम गांव का है। यहां रहने वाले अमजद उर्फ कारू पेशे से मजदूर है। वो गांव के ही फरमान के पास काम करते थे। फरमान ठेकेदार था। ठेकेदारी करते हुए वो लेबर के पेमेंट रोक लेता था। चूंकि, अमजद से उसकी दोस्ती भी थी, इसलिए धीरे–धीरे करके करीब 1 लाख रुपए की पेमेंट उसने रोक ली। इसके बाद भी सब कुछ नॉर्मल चल रहा था। दोनों साथ में ही 1 मकान को ठेके पर तैयार कर रहे थे। एक दिन फरमान के घर रिश्तेदार आए थे, तभी अमजद उसके घर रुपए मांगने पहुंच गया। इस दौरान दोनों में बहस हो गई। इससे फरमान भड़क गया। अपनी बेइज्जती से बौखलाए फरमान ने अमजद को जान मारने का मन बना लिया। पत्नी, साले और दो दोस्तों को प्लानिंग में किया शामिल
फरमान ने अपनी पत्नी रुखसार, साले और दो दोस्त सलीम और शमीम को अपनी प्लानिंग में शामिल किया। फिर 3 नवंबर की दोपहर 1.30 बजे अमजद को हिसाब करने के लिए अपने घर बुलाया। घर में चारों लोग पहले से ही मौजूद थे। रुखसार ने अमजद को चाय नाश्ता पूछने के बहाने बातों पर उलझाया। इस बीच फरमान ने अमजद को दबोच लिया। दुपट्‌टे से गला घोंटने लगा। शमीम और सलीम ने अमजद के पैर पकड़े और साले ने हाथ। 2 मिनट के अंदर ही अमजद ने दम तोड़ दिया। फिर उन्होंने रात होने का इंतजार किया। आधी रात को बॉडी पुल से नीचे फेंक दी। मां बोलीं- हमारी तो कोई दुश्मनी भी नहीं थी उससे
अमजद की मां रूबिना ने बताया कि मेरा बेटा 3 नवंबर को बेटे ने सुबह नहाकर खाना खाया और कहा कि आज छुट्टी है, काम पर नहीं जाएगा। कुछ देर बाद वह घर से बाहर चला गया। मैं भी दवाई लेने बाजार चली गई। दवाई लेकर लौटते समय मैं थक गई, तो फरमान के घर रुक गई। उसकी पत्नी रुखसार ने मुझे चाय पिलाई। उसी दौरान मुझे अपने घर से अपने बेटे की चीखने जैसी आवाज सुनाई दी। मैंने रुखसार से पूछा कि यह आवाज कहां से आ रही है। रुखसार ने कहा कि अंदर लोग बात कर रहे हैं। पहले अंदर से तेज आवाज आ रही थी, फिर धीरे हो गई और कुछ देर बाद आवाज आई ही नहीं। मैं तीन बार उठकर अंदर देखने को हुई, लेकिन रुखसार ने मुझे अंदर जाने से रोक दिया। उसने कहा कि अंदर मीटिंग चल रही है। मुझे लगा कि अमजद तो अक्सर यहां आता-जाता रहता है, शायद मोबाइल वगैरह देख रहे होंगे, इसलिए मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और घर लौट आई। फोन करने पर बेटे का मोबाइल बंद मिला, तब हुआ शक
रूबिना ने बताया कि दोपहर करीब एक बजे मैं खाने के लिए उसका इंतजार करती रही। चार बजे मैंने छोटे बेटे से कहा कि अपने भाई को फोन करो। लेकिन, जब फोन मिलाया गया तो नंबर स्विच ऑफ आ रहा था। शाम को छोटा बेटा घर आया तो मैंने उसे फिर फरमान के घर भेजा। फरमान ने कहा कि जब भाभी यहां थी, तब अमजद भी यहीं था, लेकिन बाद में वह चला गया। हमने हर जगह तलाश की, मगर कोई शक नहीं हुआ। रात के 10 बज गए तो मैं बेचैन हो गई और फिर भी उसकी खोजबीन की। सुबह दोबारा फरमान को बुलाया। मैंने कहा कि मेरा बेटा भांग पी लेता था, कहीं किसी ने ज्यादा पिला तो नहीं दी। हम भांग बेचने वालों के घर तक गए, पर अमजद कहीं नहीं मिला। सलीम और फरमान काम का बहाना बनाकर मेरे भाई को अपने घर ले गए थे
अमजद के छोटे भाई राव अशरफ ने बताया कि सलीम और फरमान काम का बहाना बनाकर मेरे भाई को अपने घर ले गए थे। जब मेरे चाचा और छोटा भाई उनके घर पहुंचे, तो वहां कई लोग मौजूद थे। जिस समय वे पहुंचे, तब वे लोग घबराए हुए दिख रहे थे। उसी समय हमें शक हुआ कि उन्होंने अमजद के साथ कुछ गलत कर दिया है। फरमान की पत्नी रुखसार भी वहीं मौजूद थीं। अशरफ ने आगे बताया कि मेरे भाई की हत्या पैसों के विवाद के कारण की गई। भाई ने बताया था कि उसके काम के कुछ पैसे सलीम और फरमान के पास रुके हुए थे। एक बार जब उसके घर मेहमान आए हुए थे, उसी समय भाई अपने पैसे मांगने गया था। उस समय उसे सब के सामने बेइज्जत किया। उसी बात की रंजिश रखते हुए यह कदम उठाया। पैसों के लेनदेन को लेकर कत्ल किया गया
अमजद के चाचा इंतजार ने बताया कि पैसों के लेनदेन को लेकर कत्ल किया गया। फरमान और उसके साले के साथ सलीम और शमीम सभी इस हत्या में शामिल है। फरमान की पत्नी रुखसार भी इस हत्या में शामिल है। जब अमजद की मां वहां थी, तब उसकी आवाज सुनी। जब भाभी बेटे को देखने अंदर कमरे में जा रही थी, तब भाभी का हाथ पकड़कर बाहर ही रोक लिया। तीन बार ऐसा ही हुआ। फिर घर भेज दिया। शव के टुकड़े किए, फिर बोरी में भरकर फेंका
ग्रामीण राव कासिम ने बताया कि गांव के आलम और इंतजार ने फरमान को अमजद को ले जाते हुए देखा था। ये दोनों इसके गवाह हैं। अमजद की हत्या दिन में ही कर दी गई थी। हत्यारे शव को ठिकाने लगाने के लिए रात होने का इंतजार करते रहे। देर रात करीब 1-2 बजे उन्होंने शव को बोरे (कट्टे) में भरने की कोशिश की, लेकिन शव उसमें नहीं आया। इसके बाद उन्होंने कुल्हाड़ी या किसी धारदार हथियार से शव के टुकड़े किए। फिर शव के टुकड़ों को बोरी में भरा और बाइक पर ले जाकर पुल की रेलिंग से नदी में फेंक दिया। अवैध संबंध की बात गलत, दोनों साथ में काम करते थे
उन्होंने कहा कि अभी सर्च ऑपरेशन चल रहा है और शव बरामद नहीं हुआ है। यह भी पता नहीं है कि शव इसी स्थान पर फेंका गया था या कहीं और। अमजद और फरमान के बीच कोई निजी दुश्मनी नहीं थी। दोनों साथ में काम करते थे। किसी अवैध संबंध वाले विवाद की बात बिल्कुल गलत है। ऐसी कोई बात नहीं थी। उन्होंने यह भी बताया कि अमजद की अभी शादी नहीं हुई थी। उसने अपने छोटे भाई की शादी कराई थी। उसे खुद के बारे में लगता था कि वह शादी के योग्य नहीं है और अगर शादी की तो बाद में संभल नहीं पाएगा और बहू को भी परेशानी होगी। भाई बोला- मां ने बेटे की आवाज पहचानी, लेकिन कमरे में जाने नहीं दिया
ताऊ के लड़के अनस ने बताया कि हत्या के बाद लगभग 12 घंटे तक अमजद की लाश उन्हीं के घर में पड़ी रही। रात होने पर शव को ठिकाने लगाने के लिए उन्होंने उसे बोरी में भरने की कोशिश की। अनस ने बताया कि शव को बोरी में डालने से पहले अमजद के दोनों पैर काटे गए थे। हत्या के समय अमजद चीख रहा था और उसकी चीखें उसकी मां ने भी सुनी थीं। मां ने आवाज पहचान कर अंदर जाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। उनका हाथ पकड़कर उन्हें बाहर की तरफ खींच लिया गया। अनस ने आगे कहा कि शमीम और इंतजार अभी फरार हैं और यही दोनों इस घटना के असली मास्टरमाइंड हैं। अगर इन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि अमजद के शव को आखिर कहां फेंका गया है। पूर्व मंत्री शयान मसूद बोले- आरोपियों को कड़ी सजा मिले
पूर्व मंत्री शयान मसूद भी ढमोला नदी पर पहुंचे। उन्होंने कहा- कई दिनों से पुलिस और प्रशासन उसकी तलाश में जुटे हुए हैं। हम उम्मीद करते हैं कि जल्द से जल्द शव बरामद हो और आरोपियों को सख्त सजा मिले। मैंने पुलिस से आग्रह किया है कि जो आरोपी अभी फरार हैं, उन्हें भी जल्द गिरफ्तार किया जाए। ——————————- ये भी पढ़ें – मेरठ में नीले ड्रम वाली मुस्कान का घर बिकाऊ है:मां-बाप का बिजनेस तबाह, भाई की नौकरी गई, अब शहर छोड़ेंगे मेरठ के सौरभ हत्याकांड के बाद 8 महीने से मुस्कान और उसका बॉयफ्रेंड जेल में हैं। मुस्कान का मायका ब्रह्मपुरी के इंद्रानगर में है। 5 नवंबर को घर पर लिखा गया ‘मकान बिकाऊ है’। मुस्कान के पिता प्रमोद रस्तोगी यहां अपनी पत्नी कविता, बेटे और बेटी के साथ रहते हैं। वो इस घर को बेचने के बाद कहां शिफ्ट होंगे। पढ़ें पूरी खबर….