आगरा में 34 साल पुराने कस्टम एक्ट के एक मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। वर्ष 1991 में एंबेसडर कार से बरामद हुए 27 सोने के बिस्कुट और डॉलर के नोट के मामले में आरोपी अशोक कुमार गुप्ता को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अचल प्रताप सिंह ने यह आदेश सुनाया। यह मामला 23 फरवरी 1991 का है। कस्टम और सेंट्रल एक्साइज विभाग की टीम उस सुबह शाहदरा चेकपोस्ट, टूंडला–आगरा हाईवे पर निगरानी कर रही थी। टीम लीड कर रहे थे अधीक्षक आर.बी. गुप्ता। इसी दौरान संदिग्ध एंबेसडर कार (UP 83 9150) को रुकने का इशारा किया गया। चालक ने कार भगाने की कोशिश की, लेकिन पीछा कर रोका गया। कार राहुल चला रहा था और उसके साथ चार लोग मौजूद थे। भीड़ बढ़ने पर कार और सभी आरोपियों को संजय प्लेस स्थित कार्यालय लाया गया। प्रारंभिक तलाशी में कुछ नहीं मिला। लेकिन निजी तलाशी में आरोपियों के गुप्तांगों से कंडोम में छिपाकर रखे गए 27 सोने के बिस्कुट और 100-100 डॉलर के 10 नोट बरामद हुए। यह पूरी कार्यवाही स्वतंत्र गवाह राजेंद्र कुमार और राहुल की मौजूदगी में हुई। कस्टम विभाग ने चार लोगों जितेंद्र कुमार जैन, श्याम कुमार, अशोक कुमार गुप्ता और नरेंद्र कुमार के खिलाफ परिवाद दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान अशोक को छोड़कर तीनों आरोपियों की मृत्यु हो गई। लम्बी सुनवाई के बाद अदालत ने अशोक कुमार गुप्ता को आरोप साबित न होने पर बरी कर दिया।