38 करोड़ का कारोबार सिर्फ कागजों पर:बरेली में जीएसटी चोरी पकड़ी गई, फर्जी बिलिंग से टैक्स क्रेडिट का बड़ा खेल उजागर

बरेली में एक बड़े जीएसटी चोरी का मामला सामने आया है, जिसने कर प्रणाली की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य कर विभाग की जांच में खुलासा हुआ है कि 38 करोड़ रुपये का कारोबार सिर्फ कागजों पर किया गया, जबकि जमीन पर न तो कोई माल था, न गोदाम और न ही कोई वास्तविक व्यापारिक गतिविधि। राज्य कर विभाग की जांच के अनुसार, सर्वश्री नाग इंटरप्राइजेज नामक फर्म ने दिसंबर 2025 में लगभग 38 करोड़ रुपये की आउटवर्ड सप्लाई (बिक्री) दर्शाई। चौंकाने वाली बात यह है कि इसी अवधि में फर्म ने एक रुपये की भी खरीद नहीं की थी। इस तरह, बिना किसी वास्तविक खरीद-बिक्री के ही पूरे कारोबार का ढांचा खड़ा कर दिया गया। यह भी सामने आया कि बरेली की इस फर्म ने कोलकाता (पश्चिम बंगाल) स्थित तीन अलग-अलग फर्मों को लगभग 6.88 करोड़ रुपये का आईजीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट गलत तरीके से पास ऑन किया। इस पूरे फर्जीवाड़े में केवल इनवॉयस का इस्तेमाल किया गया, जिसका उद्देश्य अवैध रूप से टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाना था। अधिकारियों ने बताया कि फर्म के पंजीकृत पते पर कोई गोदाम नहीं मिला। इसके अलावा, माल की आवाजाही से संबंधित कोई दस्तावेज या ट्रांसपोर्ट रिकॉर्ड भी पूरी तरह से नदारद थे। यह स्पष्ट है कि यह पूरा नेटवर्क केवल फर्जी बिलिंग और कर चोरी के इरादे से बनाया गया था। राज्य कर विभाग की शिकायत पर कैंट थाना पुलिस ने फर्म के मालिक नितेश कुमार, निवासी काधरपुर उमेरसिया रोड, बरेली के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस और कर विभाग अब इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या इस रैकेट में अन्य कारोबारी या फर्जी फर्में भी शामिल हैं।