मेरे पति सुसाइड नहीं कर सकते हैं। उनका मर्डर हुआ है। हॉस्पिटल वालों ने उनको खिड़की से नीचे फेंक दिया है। मेरे पति को खून की कमी थी, पैसे वसूलने के लिए हॉस्पिटल ने उन्हें ICU में भर्ती किया। मेरठ के एक अस्पताल की दूसरी मंजिल से कथित तौर पर कूदकर जान देने वाले संजय की पत्नी ज्योति ने ये बात कही। उन्होंने अस्पताल के स्टाफ पर पति को खिड़की से फेंकने का आरोप लगाया। सवाल किया कि जब पति संजय ICU में थे तो उनका स्टाफ ने ख्याल क्यों नहीं रखा। वे खुद टॉयलेट कैसे चले गए। अगर स्टाफ साथ था तो वे कूद किस तरह गए? घटना शुक्रवार रात की शहर के प्रतिष्ठित लोकप्रिय अस्पताल से जुड़ी है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, बाथरूम की खिड़की का शीशा तोड़ते हुए मरीज कूद गया था जबकि पत्नी ने स्टाफ पर धकेलने का आरोप लगाया है। पहले पढ़िए संजय की पत्नी ज्योति ने हॉस्पिटल पर जो सवाल उठाए… 1. संजय जब ICU में थे तो बाथरूम का अंदर से दरवाजा क्यों लगने दिया?
2. कमजोरी की हालत में बिना किसी सहारे के संजय खिड़की तक कैसे चढ़े?
3. हादसे के बाद नाइट शिफ्ट में काम करने वाले स्टाफ को क्यों हटा दिया गया? पहले जानते हैं क्या है पूरी घटना हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर कांगड़ा के रहने वाले संजय कुमार, मेरठ में परिवार के साथ रहते थे। शहर की हाइडिल कालोनी के पास वह अपनी पत्नी और बेटे शुभांक के साथ रहते थे। वह एक इन्वर्टर कंपनी में कार्यरत थे। पत्नी ज्योति के अनुसार, संजय कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। उनका इलाज डॉ.पीके शुक्ला कर रहे थे। सांस लेने में उनको दिक्कत थी। ब्लड टेस्ट कराने पर रिपोर्ट में खून की कमी आई थी। डॉक्टर ने उनको खून चढ़ाने की सलाह दी थी। 31 दिसंबर की देर रात संजय को गढ़ रोड स्थित लोकप्रिय अस्पताल में भर्ती करा दिया गया, जहां उनका ICU में इलाज चल रहा था। 15 मिनट पहले घर गई तभी मौत की सूचना आई ज्योति ने बताया- रात को वह घर खाना खाने जाती थी। इस दौरान वह स्टाफ को बताकर जाती थी। हालांकि, आईसीयू में होने की वजह से स्टाफ उनको अंदर जाने की इजाजत नहीं देता था लेकिन वह बाहर ही रहती थीं। शुक्रवार को वह घर खाना खाने निकली थी। निकलने के 15 मिनट बाद अस्पताल की ओर से फोन आया। कॉल करने वाले ने बताया कि उनके पति की दूसरी मंजिल से गिरने से मौत हो गई है। वह भागकर अस्पताल पहुंची।
अस्पताल कैंपस में जहां वे गिरे थे, चारो ओर खून ही खून पसरा था। सबकुछ खत्म हो गया था। 15 मिनट में ही मेरी दुनिया बदल गई थी। 4 यूनिट खून के लिए चढ़ाने के चक्कर में जान ले ली ज्योति ने कहा- चार यूनिट खून के लिए हॉस्पिटल ने उनके पति की जान ले ली है। सवाल उठाए कि क्या शरीर का चार यूनिट खून कम होने से कोई व्यक्ति इतनी क्रिटिकल कंडीशन में पहुंच जाता है कि उसे ICU में रखना पड़ता है। संजय को कोई बीमारी नहीं थी। इसके बावजूद उन्हें मिलने नहीं दिया जाता था। हॉस्पिटल वालों ने बड़ा बिल बनाने के लिए यह पूरा ड्रामा रचा था। अब वह अपने पति की लाश लेकर जा रही हैं। खिड़की इतनी ऊंची तो कैसे कूदे संजय? ज्योति का कहना है कि संजय को तीन यूनिट खून चढ़ चुका था और चौथा यूनिट खून शनिवार को चढ़ना था। उससे पहले ही संजय की मौत हो गई। संजय की हालत से वह वाकिफ थीं, इसलिए सवाल उठा रही हैं। पत्नी ज्योति का कहना है कि इतनी कमजोरी में संजय काफी कमजोर थे, वह बाथरूम की खिड़की तक कैसे चढ़े। खिड़की के आसपास खून लगा है। इसका मतलब गिरने से पहले ही संजय के शरीर से खून निकल रहा था। सबसे बड़ी बात कि ICU के स्टाफ को कांच टूटने और संजय के नीचे गिरने की भनक क्यों नहीं लगी? वह तो नीचे लोगों ने शोर मचाया, तब स्टाफ दौड़ा। हंसी ठहाके के बीच गुजरा पूरा दिन संजय दो बहन और चार भाई थे। उनकी तबीयत खराब होने की सूचना पर शुक्रवार सुबह दिल्ली में रहने वाली उनकी दोनों बहने भी आई थीं। संजय की हालत में सुधार देखकर वह संतुष्ट थीं। संजय भी काफी खुश थे। खुश होकर अपनी बहनों से बात कर रहे थे। बहनें शाम को अपने घर पहुंची भी नहीं थी कि संजय की मौत की सूचना उनसे पहले घर पहुंच गई। डॉक्टर बोले- मैं खुद हैरान हूं, उसने ऐसा क्यों किया?
मरीज का इलाज करने वाले डॉ पीके शुक्ला ने कहा- मरीज को एनीमिया की समस्या थी, तीन यूनिट खून उनको अभी तक चढ़ाया जा चुका था। जिसका इंतजाम उनके दोस्तों द्वारा किया गया था। मरीज से जब मेरी बात हुई तो वह कह रहा था कि मैं पहले से बेहतर महसूस कर रहा हूं। मानसिक रूप से मरीज बिल्कुल स्वस्थ था, मैं खुद हैरान हूं कि उसने ऐसा क्यों किया। हालांकि, एक बात मैंने देखी कि मरीज से उसके परिजन कम मिलने आते हैं। शायद उसकी पत्नी या किसी परिजन से कोई विवाद हुआ हो, जिसको लेकर उसने ऐसा कदम उठाया हो। समझ नहीं आया कि क्या फैमिली प्रॉब्लम थी। बाकी और कोई समस्या नहीं थी। तीन दिन में तीन बोतल खून चढ़ाया गया है। एनीमिया को कवर करने के लिए आज टेस्ट कराया, आज तो हीमोग्लोबिन भी अच्छा आया था। आज रात ही 8 बजे मैंने मरीज को देखा था। उस समय वो सही था। मैंने उससे पूछा भी कैसे हो, तो उसने कहा था कि मैं ठीक हूं। बाकी ऐसी कोई समस्या अभी तक हमारे सामने नहीं आई है। फोरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी शुक्रवार रात में लोकप्रिय अस्पताल पहुंचे थे। उनके साथ इंस्पेक्टर नौचंदी ईलम सिंह भी रहे। उन्होंने ICU के स्टाफ से पूछताछ की और फिर फोरेंसिक टीम को बुला लिया। फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए और लौट गई। तब तक बाथरूम और खून वाले स्थान तक किसी को जाने नहीं दिया गया। जानिए लोकप्रिय अस्पताल ने क्या कहा? लोकप्रिय अस्पताल के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी परमजीत रावत ने कहा- संजय नाम का मरीज 31 दिसंबर को अस्पताल में भर्ती हुआ था। वह आईसीयू में ही था। वह टॉयलेट जाने के लिए उठा। एक स्टाफ उसको लेकर गया। स्टाफ बाहर खड़ा हुआ था। मरीज टॉयलेट के अंदर था, पहले वह बाहर आया, फिर दोबारा से अंदर गया उसने गेट बंद कर लिया। शीशा तोड़कर बाहर की तरफ कूद गया। —————————– ये खबर भी पढ़ें… ‘पत्नी को मेरी मर्जी से ले जा रहे शादाब जकाती’:मेरठ में फूट-फूटकर रोने वाले पति का यूटर्न; VIDEO में कंट्रोवर्सी से फेमस होने की स्टोरी यूपी के यूट्यूबर शादाब जकाती पर पत्नी को साथ रखने का आरोप लगाने वाला पति अपनी बात से पलट गया है। उसने शुक्रवार शाम एक वीडियो जारी कर कहा- मेरी बीवी मेरी मर्जी से शादाब जकाती के साथ जा रही है। इससे पहले वह थाने में पहुंचा था और फूट-फूटकर रोने लगा। पढ़ें पूरी खबर…