5 लाख iPhone से ज्यादा तेज ‘ह्यूमन ब्रेन’:एक्सपर्ट्स बोले- हर घर में 2 रोबोट होंगे; AI के राज खोले, विद्युत ने चौंकाया

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बेहतरीन परफॉर्मेंस है पर मानव ब्रेन बेजोड़ हैं। 5 लाख आईफोन की कैपेबिलिटी से ज्यादा तेज हैं। इसमें 1500 टेराबाइट की हार्ड डिस्क से भी अधिक क्षमता मौजूद होती है। यही कारण हैं कि आंख मूंदकर AI पर भरोसा करना सही नहीं है। बेहतर परिणामों के लिए AI का इस्तेमाल सटीक ढंग से करना चाहिए। ध्यान रहें, AI में भी गलतियां हो सकती हैं। यह कहना है राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम आजाद के OSD, एडवाइजर रहे और कलाम सेंटर के संस्थापक सुजन पाल सिंह का। सुजन पाल सिंह लखनऊ के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (AKTU) और छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित AI मंथन कार्यक्रम में शामिल होने लखनऊ आए हैं। दैनिक भास्कर ने उनसे खास बातचीत की। उन्होंने बताया- ह्यूमन इंटेलिजेंस को AI से कम मानना ठीक नहीं है। AI बिना कमांड के कोई कार्य नहीं कर सकता, जबकि इंसानी दिमाग स्वयं सोचने, समझने और सृजन करने में सक्षम है। इमोशंस की कमी के कारण AI कई बार निर्णय लेने में चूक कर सकता है। इंटरव्यू के प्रमुख अंश पढ़िए… सुजन पाल बोले- हर घर में होगा रोबोट सुजन पाल सिंह ने बताया- एलन मस्क के अनुसार आने वाले समय में हर घर में दो रोबोट हो सकते हैं, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि मानव मस्तिष्क रोबोट या AI से कहीं अधिक तेज और सक्षम है। मानव दिमाग AI की तुलना में लाखों गुना तेजी से कार्य करता है। इसकी प्रोसेसिंग क्षमता लाखों आईफोन से भी अधिक है। रोजगार पर AI के प्रभाव को लेकर उन्होंने कहा- कुछ नौकरियां जरूर बदलेंगी, लेकिन AI पूरी तरह से इंसानों की जगह नहीं ले सकता। अब जान लीजिए AI मंथन में शामिल एक्सपर्ट्स ने क्या कहा… बुजुर्गों में भी बढ़ रहा सोशल मीडिया एडिक्शन AI मंथन में दिल्ली के राइस फाउंडेशन के संस्थापक और एक्सपर्ट मधुकर वार्ष्णेय ने कहा- सोशल मीडिया अब एक तरह की लत बन चुका है, जो मानसिक अशांति को बढ़ा रहा है। पहले इसकी सबसे ज्यादा चपेट में टीनएजर थे, पर अब अधेड़ और बुजुर्गों को भी ये बहुत हद तक प्रभावित कर रहा है। नोटिफिकेशन हमारी कार्यक्षमता और मानसिक एकाग्रता को प्रभावित कर रहे उन्होंने कहा-सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लगातार आने वाले नोटिफिकेशन हमारी कार्यक्षमता और मानसिक एकाग्रता को प्रभावित कर रहे हैं। आज लोग दैनिक जीवन में गूगल मैप, यूट्यूब, चैटबॉट, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स का अत्यधिक उपयोग कर रहे हैं, जिससे ध्यान भंग होना आम समस्या बन गई है। ऐसे में भोजन, चाय या विश्राम के समय सोशल मीडिया के उपयोग से बचना चाहिए। डिजिटल युग में ध्यान बनाए रखना चुनौती हालिया शोध के अनुसार डिजिटल स्क्रीन पर औसतन कोई व्यक्ति केवल 20 सेकेंड ध्यान लगा पाता है, इसके बाद वह किसी अन्य एप या काम में चला जाता है। यह मल्टीटास्किंग का भ्रम है, जिससे मानसिक उत्पादकता 40% तक घट जाती है। ये एक तरीके का ‘माइंड डिस्ट्रेक्टर’ है। मधुकर वार्ष्णेय ने कहा- AI उपयोगकर्ता की रुचि को समझकर उसी से जुड़ी सामग्री प्रस्तुत करता है। AI मानव व्यवहार से सीखता है, इसलिए रचनात्मकता और बुद्धिमत्ता के साथ इसका सकारात्मक उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने डिजिटल डिटॉक्सीफिकेशन को लेकर भी टिप्स दी। AI मंथन में शामिल इनोवेशन के बारे में जाने.. AI मंथन में गोरखपुर के कैलाश इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के छात्रों द्वारा तैयार किया गया रोबोट ‘विद्युत’ आकर्षण का केंद्र रहा। यह रोबोट न सिर्फ लाइव जानकारी देता है, बल्कि जरूरत पड़ने पर खुद को चार्ज भी कर लेता है। रोबोट को तैयार करने में करीब 4.5 लाख रुपए की लागत आई बीटेक फाइनल ईयर के छात्र अंकित कुमार सिंह ने बताया- इस रोबोट को तैयार करने में करीब 4.5 लाख रुपए की लागत आई है। रोबोट को किसी भी स्थान से रिमोट के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है और यह लाइव फीड भी भेजने में सक्षम है। उन्होंने बताया कि रोबोट 10 से 15 किलो तक का सामान उठाने में सक्षम है। हजारों मील दूर से ऑपरेट कर सकते है एक बार पूरी तरह चार्ज होने पर यह करीब 4 घंटे 30 मिनट तक लगातार काम कर सकता है। खास बात यह है कि जब बैटरी 10% रह जाती है, तो यह रोबोट अपने आप चार्जिंग मोड में चला जाता है। विदेश यात्रा के दौरान हजारों किलोमीटर दूर रहन कर भी इसे ऑपरेट किया जा सकता है। इससे लाइव मॉनिटरिंग भी की जा सकती है। सबसे अच्छी खूबी ये है कि वहां से इंस्ट्रक्शन देकर इसे काबू भी किया जा सकता है। —————- यह खबर भी पढ़िए… लखनऊ में खाना, इलाज और आयोजन महंगा:नगर निगम में गंदे पानी की सप्लाई पर हंगामा, मेयर को माता जी कहकर रोए दलित पार्षद लखनऊ मेयर के सामने उनके ही दलित पार्षद रो दिए। सदन में डबडबाई आंखें लेकर पार्षद अमित चौधरी ने कहा- उन्हें न सदन में बोलने दिया जाता है और न ही वार्ड में काम करने दिया जाता है। मेयर का ओएसडी सारे काम कराता है। पूरी खबर पढ़ें