8 साल की बच्ची की ई-रिक्शे से दबकर मौत:मुजफ्फरनगर में रोड क्रॉस कर रही थी, जैसे दौड़ी ई-रिक्शा के नीचे आ गई

मुजफ्फरनगर में 8 साल की बच्ची की ई-रिक्शे के नीचे दबने से मौत हो गई। बच्ची सड़क पार कर रही थी। तभी रिक्शा स्पीड में उसके पास आ गया। बच्ची ने जैसे ही दौड़कर बचने की कोशिश की। रिक्शा बेकाबू होकर उसके ऊपर ही पलट गया। इसका वीडियो भी सामने आया है। सड़क किनारे मौजूद लोग दौड़ते हुए बच्ची के पास पहुंचे। ई-रिक्शे को सीधा करके दबी हुई बच्ची को निकाला। उसे लेकर अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टर ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने बिना पुलिस को बताए बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया। घटना कोतवाली थाना क्षेत्र की है। हादसे की 2 तस्वीरें देखिए… अब पूरी घटना विस्तार से…
अलीपुर अटेरना गांव की रहने वाली नवाब की बेटी रेशमा की ससुराल बागपत के ककडीपुर में है। वह अपनी 8 साल की बेटी इनायत के साथ अपने मायके अटेरना आई हुई थी। शुक्रवार सुबह इनायत घर के बाहर खेल रही थी। खेलते-खेलते वह गांव के बाहर सड़क पर आ गई। बच्ची बुढाना-खतौली मार्ग वाली सड़क पार कर रही थी। अचानक एक ई-रिक्शा बच्ची के सामने आ गया। चालक ने बच्ची को बचाने के लिए जैसे ही ई-रिक्शा मोड़ा, वह बच्ची से टकराकर उसके ऊपर ही पलट गया। बच्ची ई-रिक्शे के नीचे दब गई। हादसे को देख राहगीर भागते हुए मौके पर पहुंचे। ई-रिक्शा को सीधा किया। लेकिन तब तक बच्ची की सांसें रुक चुकी थीं। लोग बोले- बच्ची चूहा छोड़ने आई थी घटना के बाद ई-रिक्शा चालक मौके से भाग गया। सूचना मिलते ही परिजन भी मौके पर पहुंच गए। बच्ची को अस्पताल लेकर गए। यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया गया। परिजनों ने कानूनी कार्रवाई करने से मना कर दिया। शव को घर लेकर आ गए। बच्ची को सुपुर्दे खाक कर दिया। बच्ची के चचेरे नाना नसीम ने बताया- इनायत मेरे भाई की नातिन थी। वह रोड पार कर रही थी। तभी ई-रिक्शा उस पर पलट गया। जिससे बच्ची की मौत हो गई। हम पुलिस कार्रवाई नहीं चाहते। वहीं, घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि बच्ची के हाथ में चूहेदानी थी। वह चूहा छोड़ने आई थी। ————————- ये खबर भी पढ़ेंः- शंकराचार्य से माफी मांगेगा प्रयागराज प्रशासन, शिष्य का दावा- लखनऊ के 2 बड़े अधिकारी संगम स्नान कराएंगे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से प्रयागराज प्रशासन माफी मांगने को तैयार हो गया है। शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार ने यह दावा किया है। उन्होंने बताया- ‘शंकराचार्य अचानक माघ मेला छोड़कर वाराणसी चले जाएंगे, प्रयागराज के अफसरों को यह उम्मीद नहीं थी। वे सोच रहे थे माघ पूर्णिमा यानी एक फरवरी के स्नान के बाद शंकराचार्य जाएंगे, तब तक उनको मना लेंगे। पढ़ें पूरी खबर…