डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय ने इंजीनियरिंग और चिकित्सा विज्ञान के बीच की खाई को खत्म करने के लिए गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य अत्याधुनिक तकनीकी शोध और नैदानिक विशेषज्ञता को मिलाकर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को पूरी तरह बदलना है। इस एमओयू पर कुलपति प्रोफेसर जेपी पांडेय, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रोफेसर राम कुमार जायसवाल और एमआरयू, सीटीयू, एआई हेल्थ एंड इनोवेशन सेल के नोडल अधिकारी प्रोफेसर राज किशोर सिंह ने हस्ताक्षर किए। कुलपति प्रोफेसर जेपी पांडेय ने बताया कि एमओयू के तहत तत्काल प्रभाव से कई परियोजनाएं लागू होंगी। इन फील्ड पर रहेगा फोकस 90 दिनों का रोडमैप तैयार किया गया है। जिसमें बायो-प्रिंटिंग व स्टेम सेल नवाचार, मानसिक स्वास्थ्य के लिए एआई और मेडिकल डिवाइस इंजीनियरिंग के तहत नए चिकित्सा उपकरणों के डिजाइन में तेजी लाई जाएगी। साथ ही ISO 14155:2020 मानकों के अनुरूप वैश्विक स्तर का नैदानिक परीक्षण भी शुरू किया जाएगा। इसके अलावा बीआरडी फार्मेसी कॉलेज और मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमआरयू) के संसाधनों का इस्तेमाल कर पांच शोधार्थियों के लिए फार्माकोथेराप्यूटिक्स में पीएचडी की शुरुआत होगी। वहीं, बीआरडी से निकलने वाले नवीन चिकित्सा आविष्कारों के लिए पेटेंट प्रक्रिया को सुगम बनाया जाएगा। इस वित्त अधिकारी केशव सिंह, बीआरडी के नोडल अधिकारी डॉ. राज किशोर सिंह, एकेटीयू के डीन प्रो. भावेश कुमार चौहान और सह-डीन डॉ. अनुज कुमार शर्मा समेत कई अन्य उपस्थित रहे। इस मकसद से हुआ MOU स्वास्थ्य तकनीक में प्रतिभाओं को निखारेंगे कुलपति प्रो. जेपी पांडेय का कहना है कि MOU के तहत स्वास्थ्य तकनीक के क्षेत्र में प्रतिभाओं को निखारने के लिए अन्य प्रयास भी किए जाएंगे। जिसमें संयुक्त हैकाथॉन व फैकल्टी डेवलपमेंट, छात्र विनिमय कार्यक्रम और सहयोगात्मक