KGMU लव जिहाद और धर्मांतरण प्रकरण उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव बनाम कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद बनता दिख रहा है। अपर्णा यादव लगातार कैंपस को धर्मांतरण की नर्सरी बता रही हैं। डॉ. सोनिया नित्यानंद राजभवन से लेकर मुख्यमंत्री आवास तक अपना पक्ष रख रही हैं। इस बीच पैथोलॉजी विभाग के जिन 2 डॉक्टरों पर आरोपी डॉ. रमीज मलिक की मदद करने का आरोप लगाया गया था उन्होंने अपनी कॉल डिटेल (CDR) निकलवाने के लिए टेलीकॉम कंपनियों में आवेदन किया है। कहा जा रहा है कि CDR देकर इन डॉक्टरों की तरफ से बेगुनाही का सबूत दिया जाएगा। हालांकि कुलपति डॉ.सोनिया नित्यानंद ने पैथोलॉजी विभाग के लैब इंचार्ज पद से डॉ.वाहिद अली को हटाया दिया है। पैथोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ.सुरेश बाबू और लैब इंचार्ज डॉ.वाहिद अली पर अपर्णा यादव ने रमीज मलिक के लगातार संपर्क में रहने का आरोप लगाया था। हंगामे से जुड़े सबूत सौंपे KGMU प्रशासन ने 13 जनवरी, मंगलवार को कुलपति कार्यालय में हंगामे के बचे सबूत शासन को सौंप दिया है। शासन ने KGMU से हंगामा और राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष के समर्थकों से जुड़े सबूत मांगे थे। KGMU प्रशासन ने वीडियो और फोटो समेत दूसरे प्रमाण उपलब्ध करा दिए हैं। आरोप है कि 9 जनवरी को राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के समर्थक कुलपति कार्यालय के सामने एकत्र हुए थे। कार्यालय पर तीन घंटे कब्जा कर रखा था। कुलपति कार्यालय की घटना के संबंध में अब तक मुकदमा दर्ज न होने से केजीएमयू शिक्षक संघ, कर्मचारी परिषद, नर्सिंग परिषद आदि संगठनों ने 14 जनवरी को OPD का बहिष्कार करने का ऐलान किया था। कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने सीएम के प्रमुख सचिव एवं प्रमुख सचिव (गृह) से मुलाकात की। दोनों अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। कुलपति की अपील पर डॉक्टर-कर्मचारियों के पांचों संगठनों ने कार्य बहिष्कार टाल दिया है। FIR दर्ज करने से पहले सबूतों की पड़ताल सूत्रों का कहना है कि राज्य महिला आयोग के पदाधिकारियों ने कहा कि अपर्णा यादव KGMU कुलपति से मिलने अकेले गईं थीं। वहीं, KGMU प्रशासन ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल के वीडियो और कैमरे से बनाई गई तस्वीरें बतौर सबूत शासन को भेजी हैं। परिसर में मुस्लिमों की भीड़ से संबंधित वीडियो और तस्वीरें भी सामने आई थीं। इस पर KGMU प्रशासन ने बताया कि एक कार्यक्रम में मुस्लिम संगठन आए थे। सुबूतों का परीक्षण के बाद ही मुकदमा दर्ज करने पर फैसला होगा। KGMU को 67 करोड़ का बिल थमाया इस बीच मंगलवार को KGMU पहुंची नगर निगम की टीम ने 60 भवनों के गृहकर के रूप में 67 करोड़ का बिल थमाया। निगम अधिकारियों ने बताया कि काफी लम्बे समय से यह बिल बकाया है। इससे पहले भी KGMU प्रशासन को बिल जमा करने के लिए नोटिस जारी किए जा चुके हैं। STF के हाथ में आई जांच
KGMU में कट्टरपंथी गतिविधियों और धर्मांतरण की जांच कर रही फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की जांच 12 जनवरी, सोमवार को स्थगित कर दी गई थी। अब इस प्रकरण की जांच STF के हाथ में आ गई है। STF की जांच और पड़ताल में कई डॉक्टर बेनकाब हो सकते हैं। इससे पहले जब 25 दिसंबर को 5 सदस्यीय जांच टीम का कुलपति ने गठन किया था, तब शायद ही किसी ने सोचा हो कि इस जांच को आगे बढ़ाने का काम STF करेगी। करीब 20 दिनों में आधा दर्जन से ज्यादा बार जांच टीम ने बैठक की और पैथोलॉजी विभाग के तमाम फैकल्टी और स्टाफ के अकेले में भी बयान दर्ज हुए थे। पीड़िता के बयान भी हुए दर्ज जांच के दौरान अचानक से कमेटी के टॉप एक्सपर्ट पूर्व पुलिस महानिदेशक भावेश कुमार सिंह ने बाकी सदस्यों को बाहर कर फैकल्टी मेंबर्स से अकेले में बातचीत की। इस दौरान उनके बयान भी दर्ज हुए। साथ ही पीड़िता और उसके पिता से भी बात कर घटना की भी विस्तार से जानकारी ली। इस दौरान पीड़िता से उसकी शिकायत पर एक्शन न लेने वाले फैकल्टी मेंबर्स की जानकारी भी हासिल की। इस बातचीत को भी इन रिकॉर्ड भी रखा गया है। सूत्रों की माने तो जांच के दौरान जब पूर्व पुलिस महानिदेशक को इस मामले में गहरी साजिश की जानकारी हुई, तभी उनके द्वारा इसकी जांच STF को देने का निर्णय लिया गया। इसके बाद STF का इस मामले में एंट्री हुई। इस बीच 12 जनवरी की शाम जब कुलपति डॉ.सोनिया नित्यानंद मुख्यमंत्री से मिलने पहुंची। तब खुद मुख्यमंत्री ने इस जांच के दायरे को बड़ा मानते हुए STF से ही आगे की जांच करने की बात कही। STF को मुहैया कराए जाएंगे दस्तावेज KGMU प्रवक्ता और फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के प्रभारी डॉ. केके सिंह कहते है कि शुरुआती जांच में कैंपस के अंदर धर्मांतरण से जुड़ा कोई गैंग सक्रिय हो, ये बात सामने नहीं आई है। कमेटी के एक्सपर्ट मेंबर पूर्व डीजी पुलिस भावेश कुमार ने जांच STF को सौंपने को कहा। खुद मुख्यमंत्री की तरफ से भी इसका आदेश दिया जा चुका है। इसके बाद जांच टीम के सभी दस्तावेज सील कराकर कुलपति कार्यालय में रख दिये गए है। जानकारी के मुताबिक STF ने इस मामले की जांच शुरू भी कर दी है। जैसे ही टीम की तरफ से डाक्यूमेंट्स मांगे जाएंगे, उन्हें ये तुरंत मुहैया कराया जाएगा। शिकायत के बाद भी एक्शन नहीं
लिखित शिकायत के बावजूद चौक कोतवाली पुलिस ने अब तक कोई एक्शन नहीं लिया है। डॉक्टरों ने कहा- जब कैंपस में कुलपति और आला अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो बाकी शिक्षक, रेजिडेंट, नर्सिंग और अन्य कर्मचारियों की सुरक्षा की बात करना ही बेकार है। पुलिस अलर्ट, LIU भी एक्टिव
KGMU में सोमवार को चिकित्सा सेवा के बहिष्कार और आंदोलन की संभावनाओं को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती की गई है। LIU भी लोगों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। पुलिस ने किसी भी तरह के हंगामे से निपटने के लिए इंतजाम किए हैं। KGMU के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने कहा कि अभी सभी वेट एंड वॉच की स्थिति में है। हमें भरोसा है कि पुलिस बहुत जल्द FIR दर्ज करेगी। पढ़िए क्या है पूरा मामला… पीड़ित महिला डॉक्टर ने सुसाइड की कोशिश की
पीड़ित महिला डॉक्टर KGMU से एमडी पैथालॉजी की पढ़ाई कर रही है। 17 दिसंबर को उसने दवा की ओवरडोज लेकर सुसाइड की कोशिश की। उसे गंभीर हालत में KGMU ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। 19 दिसंबर को उसे डिस्चार्ज किया गया। पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि KGMU से एमडी पैथालॉजी की पढ़ाई कर रहे डॉ. रमीज ने बेटी को लव जिहाद में फंसाया। उस पर शादी करने के लिए इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव बनाया। जबकि, वह पहले से शादीशुदा है। फरवरी में वह हिंदू लड़की का धर्मांतरण कराकर उससे शादी कर चुका है। मुख्यमंत्री और राज्य महिला आयोग में शिकायत की
पीड़ित के पिता ने मामले की राज्य महिला आयोग और मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की थी। इसके बाद 22 दिसंबर को राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने पीड़ित के साथ प्रेस वार्ता करके कार्रवाई का आश्वासन दिया। 24 दिसंबर को विशाखा कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद KGMU प्रशासन ने डॉ. रमीज को सस्पेंड करके परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दिया। आरोपी के खिलाफ के FIR भी दर्ज हो गई। 26 दिसंबर को कुलपति ने KGMU में कट्टरपंथी गतिविधियों की जांच के लिए 7 सदस्यीय कमेटी बनाई। आरोपी डॉ. के मां-बाप की संलिप्तता पाई गई है। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।