जलवायु परिवर्तन अब दूर का खतरा नहीं, बल्कि आर्थिक वास्तविकता है। मौसम से नुकसान भी प्रमुख वित्तीय खतरा हैं। RBI तनाव परीक्षण, बेहतर खुलासों और क्षमता निर्माण के जरिए जलवायु जोखिम को वित्तीय स्थिरता ढांचे में शामिल कर रहा है। साथ ही 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य पाने में ग्रीन फाइनेंस और ग्रीन बॉन्ड की अहम भूमिका हैं। ये कहना हैं RBI के क्षेत्रीय निदेशक पंकज कुमार का। लखनऊ विश्वविद्यालय के राधाकमल मुखर्जी हॉल में भारत में सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स और इकोनॉमिक डेवलपमेंट: अचीवमेंट्स और फ्यूचर चैलेंजेस विषय पर आयोजित दो दिवसीय ICSSR स्पॉन्सर्ड नेशनल सेमिनार में वो बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि आर्थिक विकास के लिए कई फ्यूचर चैलेंजेस भी हैं, पर उनको मैनेज कर देश तेजी से आगे बढ़ सकता हैं। संविधान और SDGs का संबंध डॉ.राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.एपी सिंह ने कहा कि SDGs भारतीय संविधान की प्रस्तावना और नीति निर्देशक सिद्धांतों से गहराई से जुड़े हैं। उन्होंने अनुच्छेद 46 और 47 का उल्लेख करते हुए पोषण, मातृत्व और जनस्वास्थ्य की अहमियत बताई। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बढ़ती लागत को SDGs की राह में चुनौती बताया और भारतीय दर्शन में प्रकृति सम्मान की परंपरा को रेखांकित किया। नीति और क्रियान्वयन पर गहन चर्चा दूसरे दिन दो समानांतर तकनीकी सत्र आयोजित हुए। इस दौरान पॉलिसी राउंडटेबल सत्र में 34 शोध पत्र प्रस्तुत हुए, जिनमें GST के प्रभाव, किसान क्रेडिट कार्ड, CBDC, वित्तीय समावेशन, महिला सशक्तीकरण और कौशल विकास जैसे विषय शामिल रहे। वहीं मानव पूंजी और समावेशी SDG मार्ग सत्र में 32 प्रतिभागियों ने मानव पूंजी विकास और समावेशी विकास पर अपने शोध प्रस्तुत किए। व्यवहार बदलाव से मिलेगी गति
पूर्व कुलपति प्रो.जेवी वैशम्पायन ने कहा कि सतत विकास की अवधारणा नई नहीं है। मिलेनियम डेवलपमेंट गोल्स के बाद 2030 तक के SDGs तय किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के अनुकूल व्यवहार और जिम्मेदार उपभोग से ही लक्ष्यों को तेजी से हासिल किया जा सकता है। विभागाध्यक्ष प्रो.अर्चना सिंह ने अध्यक्षीय वक्तव्य दिया, जबकि आयोजन सचिव डॉ. नागेंद्र कुमार मौर्य ने धन्यवाद ज्ञापित किया।