PCS अफसर पिता ने दो मासूमों का किया अंतिम संस्कार:पत्नी की हालत गंभीर, कहा- बच्चों के लिए स्कूल ड्रेस खरीदना था, कफन उठा रहा हूं

छपरा में धुंए से दम घुटने से अपने दोनों बच्चों को खोने वाले पिता विजय कुमार सिंह की पत्नी भी क्रिटिकल बनी हुई है। उनका शुगर लेबल बढ़ गया है और बीपी काफी लो हो गया है। विजय कुमार सिंह कहते हैं कि, ‘अभी तीन दिन पहले ही उन्हें नानी के यहां छोड़कर गया था। जब जाने लगा तो बेटा बोला कि पापा मुझे चिप्स खानी है। मैंने कहा था कि अब आऊंगा तो चिप्स लेकर आऊंगा, लेकिन मैं अपने बच्चे को चिप्स भी नहीं खिला सका।’ वह रोते हुए कहते हैं, ‘मेरा सबकुछ उजड़ गया। बच्चे ही नहीं रहे तो हम जिंदा रहकर क्या करेंगे। मैं तो दोनों बच्चों के स्कूल में एडमिशन की तैयारी कर रहा था। आज ड्रेस की जगह कफन उठा रहा हूं…।’ विजय कुमार सिंह वाराणसी के जिला सहकारी पदाधिकारी हैं। विजय सिंह के ससुराल छपरा में 3 बच्चों सहित 4 लोगों की मौत अंगीठी के धुंए से दम घुटने से हुई है। इनकी छोटी बहन अंजली दो होश आया था, लेकिन फिर से बेहोश हो गई है। अंजली के स्वास्थ्य में थोड़ा सुधार आ रहा है। वहीं अमित अभी भी बेहोश है। अमृता के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। वह होश में आ गई है। मृतका कमलावती देवी का अंतिम संस्कार छपरा के सेमारिया घाट पर किया जा रहा है। वहां उनके बड़े बेटे मंटू सिंह मौजूद है। वहीं मुखाग्नि दी जा रही है। जबकि तीनों बच्चों का अंतिम संस्कार कल शाम में ही हो गया था। सबसे पहले छपरा सदर अस्पताल में बिलखते पिता की तस्वीरें…. अब समझिए कैसे धुआं जहर बनकर मौत की वजह बना छपरा में अंगीठी जलाकर सोए एक परिवार में धुंए से दम घुटने से 3 बच्चे और उनकी नानी की मौत हो गई। जबकि, 3 लोगों की स्थिति गंभीर बनी है। इन चारों का पटना के रुबन हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। इनकी छोटी बहन अंजली को रविवार की सुबह होश आया था, लेकिन फिर से बेहोश हो गई है। अंजली के स्वास्थ्य में थोड़ा सुधार आया है। वहीं अमित को वेंटिलेटर पर खा गया है। अमृता के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। वह होश में आ गई है। इस हादसे में मरने वालों में 3 साल के तेजस, 4 साल की अध्याय, 7 माह की गुड़िया और 70 साल की कमलावती देवी शामिल हैं। तेजस और अध्याय सगे भाई बहन है, जबकि गुड़िया मौसेरी बहन है। कमलावती देवी इनकी नानी है। वहीं, जिनकी स्थिति गंभीर है उनमें अमीषा देवी, अंजलि देवी, अमित कुमार और अमृता देवी हैं। अमीषा, अंजलि और अमित सगे भाई-बहन है। अमृता इनकी भाभी है। तेजस और अध्याय, अमीषा और विजय सिंह के बच्चे थे, जबकि गुड़िया अंजलि देवी की बेटी थी। परिजन ने बताया घटना की रात क्या हुआ? पटना हॉस्पिटल पहुंचे अमित के भाई मंटू सिंह से हमने बात की। मंटू सिंह ने हमें बताया कि, अमीषा वाराणसी में रहती हैं। अमीषा के पति वाराणसी में ही जिला सहकारी पदाधिकारी हैं। 3 दिन पहले बच्चों और अमीषा को लेकर छपरा आए थे। वह फिर वापस चले गए। मेरी बहन अंजली छपरा में ही रहती हैं, तो वह भी आ गई थी। अमीषा के बच्चों को थोड़ी ठंड लग गई थी। उन्हें फीवर आ गया था तो छपरा में ही एक डॉक्टर से चेकअप कराया था। डॉक्टर ने कुछ दवाई लिखी और ठंड से बचने की सलाह दी थी। घटना की शाम खाना खाने के बाद सभी सोने जाने लगे। तभी ठंड से बचाव के लिए मां ने अंगीठी जला दिया। उसमें धान का भूसा और गोबर के उपले जला दिए, ताकि देर तक आग जलती रहे। घर में एक बड़ा सा हॉल है, जिसमें हम सभी इन बच्चों के साथ बैठे थे। यह कमरा पूरी तरह से एयर ब्लॉक था। रात 10 बजे मैं और मेरी पत्नी दूसरे कमरे में सोने चले गए। वहीं, मेरे भाई अमित, मेरी मां, मेरी दोनों बहनें और उनके बच्चे उसी हॉल में सो गए। अगले दिन सुबह काफी देर तक कोई नहीं उठा तो मैंने सोचा आज ठंडी ज्यादा है तो नींद आ गई होगी। सभी कंबल में छिपे होंगे। जब काफी देर तक कोई नहीं उठा तो पहले मैंने अपने भाई को फोन किया, लेकिन फोन किसी ने नहीं उठाया। फिर मेरी पत्नी कमरे को खोलने गई तो पूरा कमरा धुंए से भरा था। उन्हें लगा की घर में आग लग गई है। जब दरवाजा खुला तो धुआं बाहर निकलने लगा और मेरी पत्नी भी बेहोश हो गई। हादसे के बाद की 2 तस्वीरें…. पड़ोसी की मदद से पहुंचाया अस्पताल, फिर पटना रेफर घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे पड़ोसी नीरज गंभीर हालत में सभी को इलाज के लिए पटना लेकर आए हैं। हमने जब नीरज से बात की तो उसने बताया कि जैसे ही हमें घटना की सूचना मिली, हम भागे-भागे पहुंचे। जब घर पर पहुंचे तो अमित के बड़े भाई मंटू कन्फ्यूज थे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या हुआ है, क्या करना है। नीरज ने आगे बताया कि हमने घर के अंदर घुसकर देखा तो बच्चों और अमित की मां की मौत हो गई थी। हम जल्दी-जल्दी में अमित, उनकी भाभी और उनके दोनों बहनों को छपरा सदर अस्पताल में ले गए। जहां डॉक्टरों ने सभी को पटना रेफर कर दिया। फिलहाल पटना में इन सभी का इलाज चल रहा है। तीनों की स्थिति गंभीर बनी हुई है और सभी वेंटिलेटर पर है। बच्चों का शव देख फफक कर रो पड़े पिता इधर, घटना की सूचना मिलने पर वाराणसी से विजय सिंह छपरा सदर अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में पहुंचकर अपने बच्चों की लाश देखकर पिता विजय फफक कर रोने लगे। बार-बार कफन हटाकर अपने बच्चों का चेहरा देखते रहे। रोते हुए उन्होंने बताया कि अभी तीन दिन पहले ही उन्हें यहां छोड़कर गया था। जब जाने लगा तो बेटा मेरा बैग देखकर कहने लगा कि इसमें चिप्स रखा है। पापा मुझे चिप्स खानी है। मैंने मना किया कि चिप्स नहीं खाया जाता है तो वह जिद करने लगा। फिर मैंने कहा कि अब आऊंगा तो चिप्स लेकर आऊंगा। वहीं गुड़िया के पिता दीपक छपरा में ही एक ऑर्नामेंट की दुकान में मैनेजर का काम करते हैं। वह भी अस्पताल में अपने बच्ची को देख-देखकर लगातार रोते रहे। छपरा सदर अस्पताल में कमलावती देवी के शव का पोस्टमॉर्टम हुआ है। वहीं, बच्चों का परिवार वालों ने पोस्टमॉर्टम नहीं कराया है। तीनों बच्चों का शनिवार शाम छपरा में ही अंतिम संस्कार किया गया। वहीं, बुजुर्ग महिला का आज अंतिम संस्कार होगा। गहरी नींद के कारण घुटन महसूस नहीं हुई अंगीठी से निकलने वाली कार्बन मोनोआक्साइड (CO) गैस रंगहीन और गंधहीन होती है। यह गैस धीरे-धीरे पूरे कमरे में फैलती जा रही थी। सोते हुए लोगों को इसका एहसास नहीं हो रहा था। जैसे-जैसे रात बढ़ती गई, अंगीठी सुलगती रही। कमरे की ऑक्सीजन धीरे-धीरे कम होती चली गई और जहरीली गैस हवा में घुलती रही। करीब आधी रात के बाद बच्चे गहरी नींद में थे। 7 महीने की गुड़िया मां के पास सो रही थी। तेजस और अध्याय बिस्तर के दूसरे हिस्से में थे। नानी पास ही लेटी थीं। किसी को खांसी नहीं आई और न ही किसी ने बेचैनी महसूस की, क्योंकि CO गैस पहले दिमाग पर असर करती है। फिर इंसान सुस्त होता चला जाता है और गहरी नींद में चला जाता है। नानी के घर आए थे PCS अधिकारी के मासूम बच्चे अंजली की शादी बक्सर में विजय सिंह से हुई थी। विजय सिंह उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जिला सहकारी पदाधिकारी हैं। ठंड की छुट्टियों में बच्चों को ननिहाल लाने का मकसद यही था कि बच्चे नानी के साथ समय बिता सकें। अब जानिए ठंड में बंद कमरे में अंगीठी जलाने से कैसे होती है मौत हर साल ठंड में इस तरह की घटनाएं देशभर से आती है। ठंड के मौसम में अंगीठी, सिगड़ी या हीटर जलाना कॉमन है। इससे गर्माहट जरूर रहती है, लेकिन जरा सी लापरवाही जान को जोखिम में डाल सकती है। इससे दम घुट सकता है। जानिए किस तरह कि लापरवाही अंगीठी जलाने को जानलेवा बना सकती है। सवाल: अंगीठी की वजह से क्या-क्या परेशानी हो सकती हैं? जवाब: इससे ये 6 परेशानी हो सकती हैं- सवाल: हीटर, ब्लोअर या अंगीठी में कौन सबसे कम नुकसानदेह है? जवाब: यह सवाल अक्सर ठंड से पहले आकर लोग पूछते हैं। हकीकत में ये बात मायने नहीं रखती कि कौन-सा साधन कम नुकसानदेह और कौन सा ज्यादा। समझना यह है कि जिस जगह आप इन चीजों को यूज कर रहे हैं वहां वेंटिलेशन की सुविधा जरूर हो। ऐसा नहीं है तो तीनों से खतरा है। सवाल: अंगीठी का धुआं आंखों को किस तरह नुकसान पहुंचाता है? जवाब: आंखों के स्वस्थ रहने के लिए उनका गीला रहना बहुत जरूरी होता है, लेकिन अंगीठी की वजह से हवा में मौजूद नमी सूख जाती है, जिसकी वजह से आंखें भी सूखने लगती हैं। ऐसे में आंखों में संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। इसके अंगीठी कॉन्टैक्ट लेंस या चश्मा पहनने वालों की आंखों को भी इससे एलर्जी और दूसरी समस्या हो सकती है। सवाल: अगर अंगीठी के धुएं की वजह से शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाए तब क्या होता है? जवाब: ऑक्सीजन की सप्लाई बंद होने के बाद व्यक्ति को एस्फिक्सिया होता है। एस्फिक्सिया दिल, दिमाग और दूसरे हिस्सों में ऑक्सीजन की सप्लाई को कम कर देता है। जब दिल को कम खून सप्लाई होता है तब दूसरे टिशू सही मात्रा में ब्लड पंप करने में असमर्थ होते हैं। इस वजह से कार्डियक अरेस्ट होता है। इस स्थिति में पेशेंट को बिना देर किए ट्रीटमेंट देना चाहिए।