SSP ऑफिस में बुजुर्ग बेहोश, सिपाही ने जान बचाई:झांसी में 4 दिन पहले बेटे ने सुसाइड किया; बहू की शिकायत करने आए थे

झांसी में शुक्रवार को SSP से बहू की शिकायत करने आए एक बुजुर्ग अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। यह देख पत्नी और बेटियां रोने-बिलखने लगीं। उन्हें लगा कि बुजुर्ग की मौत हो गई। इससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। तभी एक सिपाही दौड़कर मौके पर पहुंचा। उसने बुजुर्ग को जमीन पर पीठ के बल लिटाकर सीने को जोर-जोर से दबाया। CPR दिया। मुंह पर पानी के छींटे मारे। कुछ ही पलों में सिपाही की मेहनत रंग लाई और बुजुर्ग को होश आ गया। इसके बाद ऑटो बुलाकर पीड़ित को अस्पताल भेज दिया। सिपाही की दरियादिली और उसके प्रयास की सराहना हो रही है। बुजुर्ग के इकलौते बेटे ने चार दिन पहले सुसाइड कर लिया था। बहू पर प्रताड़ित करने का आरोप है। बहू पर कार्रवाई की मांग को लेकर बुजुर्ग अपनी पत्नी और बेटियों के साथ एसएसपी ऑफिस पहुंचा था। एसएसपी से मिलकर पीड़ित बाहर आया, तभी वह गश खाकर गिर पड़ा और बेहोश हो गया था। घटनाक्रम से जुड़े 3 विजुअल देखिए… अब पूरा मामला विस्तार से पढ़ते हैं… बड़ागांव के बराठा गांव निवासी हरकुंवर देवी ने बताया- मैंने अपने इकलौते बेटे सुरेंद्र की शादी 11 मई 2016 को राधा से की थी। शादी के बाद पता चला कि राधा को पहले से लाइलाज बीमारी थी। मगर, उसके परिवार वालों ने बीमारी छुपाकर शादी कर दी। जब हमने बहू के परिवार वालों से बात की तो वे राधा को घर ले गए। उन्होंने हम पर और मेरे बेटे पर दहेज उत्पीड़न का केस कर दिया। इसके चलते बेटे को दो बार जेल जाना पड़ा। राधा के परिवार वाले दस लाख रुपए की डिमांड कर रहे थे। इससे बेटा परेशान था। हम कहां से 10 लाख रुपए लाते। माता-पिता तारीख पर गए, बेटा ने फांसी लगाई
सुरेंद्र की बहन रूबी ने बताया- 15 दिसंबर को कोर्ट में तारीख थी। इसलिए मेरा भाई सुरेंद्र अपने पिता के साथ बहन के घर करगुवांजी में रुके थे। जब भाई तारीख के लिए निकला तो धमकाया गया। इससे मेरा भाई डर गया और कोर्ट में तारीख पर नहीं आया। जबकि पिता रामसिंह और मां हरकुंवर तारीख पर पहुंच गए। जब माता-पिता तारीख करके शाम को करगुवांजी पहुंचे तो सुरेंद्र फंदे पर लटका मिला। आरोप है कि सुरेंद्र ने ससुराल वालों से परेशान होकर आत्महत्या की है। एसएसपी से मिलने आया था परिवार
सुरेंद्र अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी 6 बहनें हैं। सभी बहनों और माता-पिता शुक्रवार को एसएसपी से मिलने पहुंचे। यहां एसएसपी को अपनी पीड़ा सुनाई। एसएसपी ने नवाबाद थाना प्रभारी से बात कर पीड़ित परिवार को थाने भेजा। परिवार एसएसपी ऑफिस से बाहर निकला, तभी पिता रामसिंह की हालत बिगड़ गई। वह सीना पकड़कर गिर पड़े और बेहोश हो गए। यह देखकर पत्नी और बेटियां रोने लगी। चीख पुकार सुनकर कोतवाली थाने का सिपाही अवध नरेश पहुंच गया। उसने सीपीआर दिया तो रामसिंह को होश आ गया। इसके बाद ऑटो बुलाकर बुजुर्ग को अस्पताल भेजा गया। ऑटो के पैसे भी सिपाही ने दिए। सीपीआर क्या है? सीपीआर यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन एक ऐसी इमरजेंसी लाइफ सेविंग प्रोसिजर है, जो तब की जाती है, जब हृदय की धड़कन रुक जाती है। सीपीआर किसी व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट से बचने में मदद कर सकता है। भले ही आपको सीपीआर देना न आता हो, आप सिर्फ अपने हाथों का इस्तेमाल करके किसी व्यक्ति की मदद कर सकते हैं। इसके लिए आपको तुरंत एक्शन लेने की जरूरत है। ………………… ये भी पढ़ें- एक्ट्रेस पूजा चोपड़ा ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए:बनारस की गलियों में 3 दिन तक घूमीं, बोलीं- काशी आकर मन को शांति मिलती है बॉलीवुड एक्ट्रेस पूजा चोपड़ा ने काशी पहुंचीं और बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए। उन्होंने कहा- काशी में आकर मन का शांति और सुकून मिलता है। इस शहर में आध्यात्मिक एनर्जी है। उन्होंने गंगा नदी में बोटिंग की और घाटों की सुंदरता भी देखी। पढ़िए पूरी खबर…