यूजीसी से जुड़े नए विवाद पर अब सुप्रसिद्ध कवयित्री अनामिका जैन अंबर ने खुलकर आपत्ति जताई है। अनामिका के पति सौरभ जैन भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। अनामिका ने कहा कि “किसी भी कानून को बराबरी के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए। न्याय वहीं संभव है जब दोनों पक्षों को समान रूप से सुना जाए, पूर्वाग्रह नहीं बल्कि तर्क और साक्ष्य के आधार पर निर्णय हो।” उन्होंने इसी मुद्दे पर अपनी कविता में तीखा व्यंग्य किया और कहा- “ऐसा न हो कि सवर्ण होना अपराध हो जाए… अंधियारों की आंखों में जो भोर के सूरज खटके होंगे, उनके मान-पत्र के शीशे चोटिल होंगे, चटके होंगे… और सीना ताने झूठ किसी के भरी अदालत घूमेंगे, सहमे-सहम सत्य हमारे बस फांसी पर लटके होंगे।” इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यूजीसी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है और राजनीतिक हलकों में भी इसे लेकर प्रतिक्रियाएं जारी हैं।