उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बार 9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट पेश किया है। पिछले साल यह करीब 8 लाख करोड़ रुपये था। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर दिनेश कुमार ने कहा कि सरकार अपनी तय आमदनी के हिसाब से सभी क्षेत्रों में पैसा बांटने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि बजट का मतलब होता है – जितनी कमाई है, उसी के अंदर अलग-अलग कामों के लिए पैसा तय करना। सरकार की कमाई भी सीमित होती है, इसलिए उसी में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, उद्योग जैसे सभी क्षेत्रों को संभालना पड़ता है। शिक्षा पर करीब 12% खर्च
प्रो. दिनेश कुमार ने बताया कि इस बार सरकार ने शिक्षा पर लगभग 12 प्रतिशत खर्च करने का प्रस्ताव रखा है। इसमें उच्च शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और तकनीकी शिक्षा सब शामिल हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा पर ज्यादा खर्च करना जरूरी है, क्योंकि दूसरे विकासशील देश हमसे ज्यादा पैसा शिक्षा पर लगा रहे हैं। अगर हमें आगे बढ़ना है तो अपने युवाओं को मजबूत बनाना होगा। सरकार ने नए विश्वविद्यालय खोलने, हर जिले में महिला छात्रावास बनाने और मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाने की बात कही है। लेकिन उन्होंने साफ कहा कि सिर्फ कॉलेजों की संख्या बढ़ाना काफी नहीं है, पढ़ाई की गुणवत्ता भी अच्छी होनी चाहिए। एआई के लिए 200 करोड़ से ज्यादा
बजट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए 200 करोड़ रुपये से ज्यादा रखने की बात कही गई है। इस पर प्रो. दिनेश ने कहा कि आज का युवा मोबाइल और ऐप चलाना जानता है, लेकिन सही ट्रेनिंग लेना भी जरूरी है। सिर्फ इस्तेमाल करना अलग बात है और उसे गहराई से सीखना अलग। सरकार चाहती है कि युवा तकनीक के मामले में मजबूत बने। उन्होंने कहा कि हमारी पारंपरिक पढ़ाई और ज्ञान को छोड़ा नहीं जा सकता, लेकिन उसे नई तकनीक से जोड़ना जरूरी है। दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है, इसलिए हमें भी अपने बच्चों को उसी हिसाब से तैयार करना होगा। मेरठ समेत चार शहरों के लिए 700–800 करोड़
मेरठ, कानपुर, मथुरा और वृंदावन के विकास के लिए करीब 700 से 800 करोड़ रुपये रखने की बात कही गई है। प्रो. दिनेश के अनुसार मेरठ में हस्तशिल्प, कपड़ा उद्योग, छोटे उद्योग और खेल सामान के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि योजना बनाना आसान है, लेकिन उसे सही तरीके से लागू करना ज्यादा जरूरी है। अगर योजनाएं ठीक से लागू हुईं तो मेरठ आगे बढ़ सकता है। महंगाई भी बड़ी चुनौती
उन्होंने यह भी कहा कि महंगाई बढ़ रही है, इसलिए शिक्षा के लिए दिया गया पैसा पूरी तरह पर्याप्त नहीं कहा जा सकता। फिर भी सरकार कोशिश कर रही है कि सीमित पैसों का सही इस्तेमाल हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा पर खर्च आज के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी निवेश होता है। अब देखना यह होगा कि बजट की घोषणाएं जमीन पर कितना असर दिखाती हैं।