चुनावी साल से पहले योगी सरकार के बजट को लेकर प्रदेश भर में लोगों के अंदर उत्सुकता देखी गई। एक्सपर्ट्स से लेकर आम लोगों की निगाहें बजट पर ही टिकी रही। तमाम ऐसे भी लोग रहे जो बेबाक अंदाज में यूपी के बजट 2026 को खुलकर अपनी बात रखते दिखे। पढ़िए बजट पर क्या हैं लखनऊ के लोगों की राय.. लखनऊ विश्वविद्यालय के डिपार्मेंट आफ इकोनॉमिक्स की फैकल्टी डॉ.रोली मिश्रा कहती हैं कि इस बजट को देखकर हम यूपी को ‘एक्सप्रेस स्टेट’ कह सकते हैं। पहले भी इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस रहा है इस बार के बजट में भी एक्सप्रेस वे और इंफ्रास्ट्रक्चर बिल्डिंग पर फोकस हैं। ये पहल बिल्कुल सही हैं, हम सही डायरेक्शन में हैं इससे न केवल जीडीपी को ग्रोथ मिलेगी, बड़े पैमाने पर जॉब क्रिएशन भी हो सकेगा। इसके अलावा बजट में AI मिशन को प्रमोट किया गया है। Gen Z के लिहाज से भी यह बेहद अहम हैं। इसके बहुत दूरगामी परिणाम मिलेंगे। साथ ही खेती और किसानी में महिलाओं की परोक्ष रूप से सहभागिता बढ़ाने की दिशा में भी अहम बढ़ाया गया हैं। महिला गन्ना किसानों को सरकारी केंद्रों पर पहले पर्ची देने का ऐलान और प्राथमिकता देने की पहल भी बहुत अच्छी हैं।
समय से प्रोजेक्ट पूरा करने की होगी दरकार लखनऊ के दिग्गज अर्थशास्त्री और डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. एपी तिवारी ने बताया कि इस बजट में चुनावी घोषणाओं से बचते हुए आर्थिक मजबूती पर जोर खजाने की स्वस्थ नीति का परिचायक है। फोकस विकास पर है। फिर चाहे वह आर्थिक हो या सामाजिक।
यूपी का अभी तक का सबसे बड़ा बजट है। वर्ष 2025-26 की तुलना में बजट का आकार 12.9% से बढ़ाया गया है। पूंजीगत खर्च में 19.5% की वृद्धि की गई है। जो इंन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर विकास की रफ्तार को बढ़ाने वाली होगी। दरकार होगी प्रोजेक्ट्स को समय से पूरा करने की। राजस्व खर्च जो बुनियादी तौर पर अनुत्पादक होता है। उस पर अंकुश रखकर राजस्व बचत की स्थिति को बनाये रखना वित्तीय अनुशासन की संकेत देती है।
कृषि, ODOP, एमएसएमई, कौशल विकास,रोजगार, निर्यात संवर्धन, उभरती टेक्नोलॉजी यथा एआई पर खास जोर है। शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा, युवा वर्ग और किसानों के लिये खास प्रावधान सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता हैं। राज्य की क्षमता को बढ़ाने वाला बजट डॉ.राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय के जॉइंट रजिस्ट्रार डॉ.संजय दिवाकर ने बताया बजट में मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा-स्वास्थ्य, कृषि एवं ग्रामीण विकास, MSME और रोजगार सृजन पर जोर दिया गया है। शिक्षा (12.4%), स्वास्थ्य (6%), कृषि और ग्रामीण विकास (9%) जैसे मूलभूत क्षेत्रों को मजबूत आवंटन मिला है। बजट से राज्य में विकास को गति मिलने के साथ सामाजिक कल्याण और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने का प्रयास दिखता है। बजट में मेडिकल-हेल्थ पर फोकस आशियाना स्थित चेतना डेंटल क्लिनिक के चेयरमैन डॉ.संजीव अवस्थी कहते है कि बजट में कई खूबियां नजर आती हैं।सरकार का फोकस नागरिकों के हेल्थ पर है। जिस तरह से बीमारियां बढ़ रही हैं, यदि सरकारी संस्थानों को मजबूत किया गया और कम दामों में बेहतरीन इलाज की सुविधा यहां मिलने लगी तो यह सभी के लिए बहुत बड़ी राहत हैं। यही कारण हैं कि मैं बजट को लेकर बेहद पॉजिटिव फीलिंग रख रहा हूं। बजट को लेकर मन में आशंका विष्णु कुमार कहते हैं कि सरकार ने 10 लाख नौकरी देने का वादा तो जरूर किया है पर यह नौकरियां कैसे मिलेगी इसको लेकर मन में आशंका है। मैं खुद युवा हूं और अच्छी नौकरी पाना ही पढ़ाई का मुख्य मकसद हैं। इस बजट में मुझे युवाओं के लिए बहुत कुछ नहीं दिखा पर यदि नौकरी मिलती है तो सही मायने में यह बजट हितैषी होगा। खेती और किसानों को लेकर बजट में निराशा लखनऊ विश्वविद्यालय के दूसरे शोध छात्र प्रभात कहते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर के पॉइंट ऑफ व्यू से तो भले ही इसे अच्छा बजट कहा जा सकता है पर मैं जिस विषय पर शोध कर रहा हूं उसको लेकर बजट में कुछ भी नहीं है। मेरा शोध का विषय खेती और किसानी पर प्राकृतिक आपदाओं का असर है। मुझे उम्मीद थी कि सरकार इस और भी कुछ ठोस कदम उठाएगी पर किसानों को उनके हाल पर ही छोड़ दिया गया है। टेक्नोलॉजी का उपयोग करके इस दिशा में भी पहल करने की जरूरत है। उम्मीद है आने वाले बजट में इस पर जरूर प्रावधान किए जाएंगे।