अब शादी सिर्फ एक सामाजिक रस्म नहीं, बल्कि डिजिटल कंटेंट प्रोजेक्ट बन चुकी है। हर रस्म, सजावट और डांस अब इंस्टाग्राम ट्रेंड्स को ध्यान में रखकर डिजाइन किए जाते हैं। पहले परिवार सोचते थे “लोग क्या कहेंगे?”, अब कपल्स सोचते हैं “रील पर कैसा दिखेगा?” हर जोड़ा चाहता है कि उसकी शादी न सिर्फ याद रहे, बल्कि ट्रेंड करे। हर किसी के लिए बड़े फोटोग्राफर या ड्रोन शूट आसान नहीं। अच्छी बात ये है कि अब शानदार तस्वीरों के लिए भारी खर्च नहीं, बस थोड़ी प्लानिंग, थोड़ी क्रिएटिविटी और सही टूल्स चाहिए। ‘बैंड, बाजा, बजट’ के पांचवें और आखिरी एपिसोड में बात इसी नए डिजिटल वेडिंग कल्चर की। क्यों अब कपल्स शादी से पहले ‘रील डायरेक्टर’ हायर कर रहे? क्यों हल्दी-मेहंदी में इंस्टा-फ्रेंडली बैकड्रॉप बन रहे? कैसे छोटी शादियों का बजट भी फोटोजेनिक बनने में लग रहा? हम बताएंगे वो आसान ट्रिक्स और टूल्स जिनसे मोबाइल कैमरे से भी शूट बने सिनेमैटिक, और आपकी शादी की रील हो बजट में वायरल। लखनऊ के अभिजीत सरकारी स्कूल में टीचर हैं। अपनी शादी याद करके मुस्कुराते हुए कहते हैं, “मैं और संध्या चाहते थे कि शादी में सिर्फ सजावट नहीं, हमारी कहानी भी दिखे। हर फोटो में अपना एहसास झलके।” वे आगे जोड़ते हैं, “पहले बस रस्में होती थीं, अब हर पल कैमरे में कैद किया जाता है, क्योंकि इंस्टाग्राम का जमाना है।” अभिजीत और संध्या ने ये सब लो बजट में किया। उन्होंने बड़े स्टूडियो की जगह लोकल फोटोग्राफर टीम को चुना। मोबाइल शूट और DSLR कैमरा दोनों का मिक्स इस्तेमाल हुआ। डेकोरेशन में ज्यादा रोशनी रखी, ताकि फोटो नेचुरल आएं। एडिटिंग के लिए एक कॉलेज स्टूडेंट को फ्रीलांस प्रोजेक्ट दिया। खर्च आधा रह गया, क्वालिटी दोगुनी। संध्या हंसकर कहती हैं, “पैसा नहीं, प्लानिंग चाहिए। हमारी शादी इंस्टा-फ्रेंडली भी थी और जेब-फ्रेंडली भी।” एक्सपर्ट्स से जानिए कम बजट में क्वालिटी वेडिंग शूट के टिप्स इंस्टा-फ्रेंडली शादी के लिए सबसे जरूरी है प्लानिंग गोरखपुर के फोटोग्राफर भास्कर श्रीवास्तव बताते हैं कि पहले क्लाइंट फोटो एल्बम चाहते थे, लेकिन आजकल रील्स की डिमांड होती है। कपल्स चाहते हैं कि शादी की हर रस्म, हर एंट्री इंस्टा ट्रेंडिंग लगे। 3-4 साल पहले दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों से शुरू हुआ ये ट्रेंड अब छोटे शहरों को भी इन्फ्लुएंस कर रहा है। भास्कर बताते हैं कि कम बजट में भी यादगार फोटो-वीडियोग्राफी हो सकती है। बस सही प्लानिंग की जरूरत होती है। महंगे डेकोर या बड़ा सेटअप जरूरी नहीं होता। लोकल टच और अच्छी कहानी ही असली लग्जरी होती है। आसपास की प्री वेडिंग लोकेशन, DIY डेकोरेशन और कम टीम के साथ भी अच्छी रील्स बनाई जा सकती हैं। लाइव एडिटिंग टीम रखने से कंटेंट तुरंत तैयार हो जाता है। लोकल फोटोग्राफर कम बजट में अच्छी फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कर सकते हैं। उन्हें आसपास की प्री वेडिंग शूटिंग लोकेशन की अच्छी जानकारी होती है। नेचुरल लोकेशन पर महंगी लाइटिंग की जरूरत भी नहीं होती। आप चाहें तो अपने ही घर की छत या गार्डन में भी शूट कर सकते हैं। वहां भी शानदार बैकग्राउंड मिल सकता है। 15 हजार में सिनेमैटिक शॉट्स बनाते है यादगार लम्हे लखनऊ के फोटोग्राफर शमीम खान बताते हैं कि बजट कम है तो छोटी लोकेशन लेनी चाहिए। DIY डेकोरेशन और कम टीम के साथ शूट करने से खर्च बचता है। ड्रोन और गिंबल का इस्तेमाल करके बहुत अच्छे इफेक्ट दिए जा सकते हैं। लाइव एडिटिंग से रील तुरंत तैयार हो जाती है। इससे महंगे एल्बम की जरूरत कम हो जाती है। अगर 5 लाख रुपए का बजट है तो 15 हजार रुपए में अच्छी फोटो-वीडियोग्राफी हो सकती है। इसके लिए पहले कपल को बताना होता है कि वे किन पल को कैप्चर करना चाहते हैं। इस बजट में हम बड़ी टीम नहीं रखते, छोटे पैकेज में काम करते हैं। DSLR कैमरा, गिंबल और 1-2 असिस्टेंट काफी होते हैं। हल्दी, मेहंदी और शादी में सिर्फ मेन फंक्शन शूट करते हैं। वीडियो के लिए स्लो मोशन और कुछ सिनेमैटिक शॉट्स लिए जाते हैं। सभी रस्मों के स्लो मोशन और क्लोजअप शॉट्स जरूरी गोरखपुर के फोटोग्राफर यश प्रताप बताते हैं कि हल्दी-मेहंदी का फंक्शन हो या शादी, तीन मेन शॉट्स होने ही चाहिए। पहला मेन सीन,एंट्री और ग्रुप शॉट्स। दूसरा डांस और तीसरा कॉमिक सीन। सभी के क्लोजअप शॉट्स भी होने चाहिए। ये मोमेंट्स फोटो और वीडियो में जान डाल देते हैं। बहुत ज्यादा मंहगे कैमरे की जरूरत नहीं होती, जरूरी है डेकोरेशन और लाइटिंग। इसके लिए हम फ्लोर रिफ्लेक्शन और डेकोरेट सीलिंग (छत) के शॉट्स बना सकते हैं। हल्दी-मेंहदी जैसे फंक्शन में रील्स के लिए ड्रोन से 360 डिग्री शॉट्स ले सकते हैं। दोस्त-रिश्तेदार हाथों फंकी स्लोगन लिए स्लेट्स पकड़ाकर भी रील्स बनाई जाती हैं। इनके बीच में रस्मों के कुछ शॉट्स और इमोशनल पल डाल कर बेहतरीन रील बनाई जा सकती है। यूपी के शहर हैं प्री-वेडिंग शूट के लिए खास फोटोग्राफर प्रिंस अवस्थी बताते हैं कि यूपी के कई शहर ऐसे हैं, जहां कपल्स प्री-वेडिंग शूट कराने आते हैं। बनारस में अस्सी घाट पर सुबह की आरती और गंगा का बैकग्राउंड, दशाश्वमेध घाट पर शाम की आरती और दीपदान के शॉट्स, गलियों में लोकल कल्चर और वाइब्रेंट रंगों की दीवारों का बैकग्राउंड हो सकता है। गंगा में नाव पर फोटो शूट में रिफ्लेक्शन का इस्तेमाल किया जा सकता है। अयोध्या में रामायण थीम पर शूट होता है। राम मंदिर के आसपास का धार्मिक बैकग्राउंड, सरयू घाट और गुप्तार पर सुबह या शाम के समय कपल शूट किया जा सकता है। अयोध्या का नया ब्रिज मॉडर्न और हेरिटेज बैलेंस का अच्छा काम्बिनेशन है। आगरा में ताजमहल और यमुना किनारे रॉयल और रोमांटिक शूट हो सकता है। वहीं, आगरा का किला, मुगल गार्डन, शीश-महल, फतेहपुर सीकरी में हेरिटेज थीम के साथ शूट हो सकता है। यूपी के इन शहरों में भी प्री-वेडिंग शूट चलन बढ़ा फोटोग्राफर शमीम खान बताते हैं कि मथुरा-वृंदावन में आध्यात्मिकता और प्यार का अनोखा मेल दिखता है। यमुना किनारे घाट, गोवर्धन पर्वत, बरसाने की गलियां और प्रेम मंदिर के आसपास की लाइटिंग, हर फ्रेम को सिनेमैटिक लुक देती हैं। रील्स बनाने के लिए फ्लोरल पर्दे, घुंघरू और बांसुरी का म्यूजिक एकदम परफेक्ट बैकग्राउंड देते हैं। अगर शादी मथुरा क्षेत्र में हो तो राधाकृष्ण थीम डेकोर आजकल बहुत ट्रेंड में है। शमीम बताते हैं कि मेरठ में प्री-वेडिंग शूट के लिए हेरिटेज और मॉडर्न दोनों लोकेशन मिल सकती हैं। गांधी बाग, औघड़नाथ मंदिर, सूरजकुंड और आसपास के फॉर्म हाउस शूट के लिए पसंदीदा जगहें हैं। यहां के ग्रीन गार्डन, खुले मैदान और पुरानी हवेलियां फोटोग्राफी को क्लासिक लुक देती हैं। ड्रोन और गिंबल कैमरे से शूट करने पर हर फ्रेम ऑटोमैटिकली ‘रील रेडी’ बन जाता है। इसके अलावा झांसी भी एक बेहतर आप्शन हो सकता है। झांसी में किले का हेरिटेज बैकग्राउंड फोटोग्राफी को रॉयल और ग्रैंड टच देता है। पुराने किले की दीवारों, लाल पत्थरों और आर्च गेट के बीच कपल शॉट बेहद शानदार आते है। इसके अलावा लक्ष्मी तालाब, सिविल लाइन पार्क और झांसी के पास ही ओरछा के मंदिर और घाट प्री-वेडिंग शूट के लिए बेहतरीन ऑप्शन हैं। **** कॉपी एडिट- कृष्ण गोपाल ग्राफिक्स- सौरभ कुमार ये 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बैंड, बाजा, बजट-4; सही मेकअप से शानदार बनेगी शादी की रील:वेदर, स्किन और आउटफिट के हिसाब से चुनिए मेकअप और ज्वेलरी कॉम्बो ‘बैंड, बाजा, बजट’ के चौथे एपिसोड में बात नई खूबसूरती की- जहां मेकअप सिर्फ चेहरा नहीं, आत्मविश्वास निखारता है। हम बताएंगे कैसे स्किन और मौसम के हिसाब से सही प्रोडक्ट चुनें। आउटफिट के साथ मेकअप का परफेक्ट मैच बनाएं बजट में। पूरी खबर पढ़िए…