UPSI भर्ती परीक्षा में विवादित प्रश्न:कानपुर में विकल्प में ‘पंडित’ शब्द देख भड़के लोग, बोले- यह समाज को बांटने वाली सोच

उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा का एक प्रश्न सोशल मीडिया पर वायरल होकर चर्चा और विवाद का केंद्र बन गया है। परीक्षा में ‘अवसर के अनुसार बदल जाने वाला’ वाक्यांश के लिए दिए गए विकल्प में ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग किए जाने पर समाज के कई प्रतिनिधियों ने कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में जातिगत शब्दों का प्रयोग समाज में फूट डालने की साजिश है। ‘फूट डालो और राज करो’ वाली राजनीति का आरोप
अनुज त्रिपाठी ने कहा कि यह सब 2027 के चुनाव को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अंग्रेजों की तरह ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले यूजीसी और अब ब्राह्मणों को टारगेट करना पूरी तरह गलत है। शिक्षा के जरिए समाज को बांटने की कोशिश
शिव प्रताप सिंह ने प्रश्न को समाज को बांटने वाला बताते हुए इसकी घोर निंदा की। उनका कहना है कि शिक्षा का मकसद जागरूक करना है, किसी वर्ग का अपमान नहीं। विकल्प में ‘पंडित’ शब्द का होना बेहद आपत्तिजनक है और सरकार को इसे गंभीरता से देखना चाहिए। बच्चों के मन में बोया जा रहा नकारात्मक बीज
सोशल मीडिया पर प्रश्न पत्र वायरल होने के बाद ऋषभ शुक्ला ने कहा कि यह देखकर वह बेहद आहत हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे सवाल क्यों रखे जा रहे हैं, जो बच्चों के मन में जातिवाद और नकारात्मकता पैदा करें। ओम शुक्ला ने भी सरकार से तत्काल संज्ञान लेने और पेपर तैयार करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की। ‘सबका साथ-सबका विकास’ पर सवाल
विकास त्रिपाठी ने कहा कि भाजपा सरकार के नारे के बावजूद, जो वर्ग सरकार की जड़ था, वही तोड़ा जा रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर प्रश्न पत्र में हमें ‘अवसरवादी’ बताया गया, तो 2027 के चुनाव में जनता भी अवसर के अनुसार ही फैसला करेगी। यह नाराजगी दर्शाती है कि युवा वर्ग इस प्रकरण को लेकर बेहद गंभीर है।